इंसानियत की जीत : ठेले पर बैंक पहुंची बुजुर्ग दादी के घर पहुंचे मैनेजर, हाथ जोड़कर मांगी माफी

फर्रुखाबाद : कभी-कभी एक घटना केवल व्यवस्था की खामियों को ही नहीं उजागर करती, बल्कि इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल भी बन जाती है। फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ क्षेत्र में 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला को पेंशन लेने के लिए ठेले पर बैंक ले जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब सुखद मोड़ पर पहुंच गया है। बैंक मैनेजर ने स्वयं बुजुर्ग महिला के घर पहुंचकर अपनी गलती स्वीकार की और उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगी।

वीडियो वायरल होने के बाद बदली तस्वीर

फतेहगढ़ के हाथी खान मोहल्ले की रहने वाली 73 वर्षीय किशन प्यारी पिछले 26 वर्षों से पेंशन प्राप्त कर रही हैं। बीते 31 मई को हुए एक हादसे में उनका पैर टूट गया था, जिसके कारण वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गई थीं।

परिजनों के अनुसार, जब उनका पोता मनु पाल पेंशन निकालने बैंक पहुंचा तो अंगूठा सत्यापन के लिए बुजुर्ग महिला को स्वयं बैंक लाने की बात कही गई। परिवार ने महिला की गंभीर स्थिति बताई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। मजबूर होकर बेटा संजीव पाल और पोता मनु पाल दादी को भीषण गर्मी में ठेले पर लिटाकर बैंक ले गए। रास्ते भर उनके हाथ में धूप से बचाव के लिए छाता पकड़ा गया।

इस दर्दनाक दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। मामले ने प्रशासन और बैंक अधिकारियों का भी ध्यान आकर्षित किया।

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रविवार को घर पहुंचे बैंक मैनेजर

मामले की जानकारी मिलने के बाद रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे बैंक मैनेजर प्रवेश कुमार वर्मा स्वयं किशन प्यारी के घर पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग महिला के सामने बैठकर अपनी गलती स्वीकार की और भावुक अंदाज में कहा—

“दादी जी, मुझे माफ कर दीजिए। हमसे गलती हो गई। मुझे आपकी पूरी स्थिति की जानकारी पहले नहीं थी। जैसे ही मुझे घटना का पता चला, मैं तुरंत आपके घर आया हूं। आप हमारी पुरानी और सम्मानित ग्राहक हैं। भविष्य में ऐसी कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।”

मैनेजर ने आश्वासन दिया कि बैंक वरिष्ठ नागरिकों और अस्वस्थ ग्राहकों की सुविधा के लिए हर संभव मदद करेगा।

बैंक ने बताई अपनी व्यवस्था

बैंक मैनेजर ने बताया कि बैंक में बुजुर्ग और बीमार ग्राहकों को घर पर सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि हर महीने 8 से 10 ऐसे ग्राहकों को डोरस्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जाती है। इस मामले में संचार की कमी और परिस्थितियों की पूरी जानकारी न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

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परिवार ने भी खत्म किया विवाद

बैंक मैनेजर के घर पहुंचकर माफी मांगने और संवेदनशील व्यवहार दिखाने के बाद परिवार का गुस्सा भी शांत हो गया। बुजुर्ग महिला के पोते मनु पाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी उनकी ओर से भी हुई थी।

उन्होंने कहा—“बैंक स्टाफ हमेशा हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार करता है। मैनेजर सर खुद घर आए, उन्होंने माफी मांगी। मैंने भी उनसे माफी मांग ली है। अब हमारे बीच कोई शिकायत या विवाद नहीं है।”

आरबीआई के नियमों की फिर हुई चर्चा

घटना के बाद एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और आरबीआई की गाइडलाइन पर चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से अस्वस्थ ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं उनके घर तक पहुंचाने का प्रावधान है।

डोरस्टेप बैंकिंग सुविधा का उद्देश्य यही है कि बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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इंसानियत की मिसाल बना यह घटनाक्रम

जहां वायरल वीडियो ने व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े किए थे, वहीं बैंक मैनेजर द्वारा स्वयं घर पहुंचकर माफी मांगना और परिवार द्वारा उसे स्वीकार करना इंसानियत, संवाद और आपसी सम्मान की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

यह घटना बताती है कि गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन उसे स्वीकार कर सुधारने का साहस ही किसी व्यक्ति और संस्था की वास्तविक पहचान होती है।यह संस्करण समाचार वेबसाइट, अखबार या पोर्टल पर प्रकाशित करने योग्य विस्तृत फीचर-स्टोरी शैली में तैयार किया गया है।

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