कांग्रेस को लेकर बसपा गर्म तो सपा नर्म, जानें क्या है अखिलेश की योजना

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा गठबंधन के साथ उतर रही है. इस गठबंधन में दोनों की सहमति से कांग्रेस को बाहर रखा गया है, लेकिन कांग्रेस को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती का रुख अलग-अलग देखा जा रहा है. जहाँ एक ओर मायावती कांग्रेस पर हमलावर देखी जा रहीं हैं वहीं दूसरी ओर अखिलेश लगातार नरम रुख अपनाए हुए हैं.


राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव चुनाव बाद कांग्रेस के साथ संभवनाओं को खत्म नहीं करना चाहते हैं, यही कारण है कि कांग्रेस पर हमला करने से बच रहे हैं. प्रियंका गाँधी ने जब राजनीति में औपचारिक कदम रखा तब अखिलेश ने उन्हें और राहुल गाँधी को बधाई भी दी.


सपा की कांग्रेस के साथ संभावनाओं को जिंदा रखने की कोशिश अखिलेश द्वारा किये गए 29 जनवरी के एक ट्वीट में भी देखी गयी. अपने ट्वीट में सपा प्रमुख लिखते हैं कि “2019 का लक्ष्य स्पष्ट है: भाजपा हटाओ, उम्मीद जगाओ. चुनाव जीत कर रोस्टर, आरक्षण, फ़सलों के दाम, इंकम गारंटी और सब ही मुद्दे आपस में तय करेंगे. लेकिन यह तब सम्भव है जब लक्ष्य सत्य और संविधान की सुरक्षा होगा ना कि सत्ता की लालच. आप को आप का हक़ वही दे सकते हैं जो आप के हैं”



बता दें कि अखिलेश यादव का यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के गरीबों की न्यूनतम आय की गारंटी के ऐलान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसे राजनीतिक जानकार चुनाव बाद कांग्रेस के साथ संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं.


वहीं अखिलेश के गठबंधन की दूसरी साथी बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस को कोई भी ढील देने को तैयार नहीं हैं, और हमला बोलने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहीं हैं. हाल ही में राहुल गाँधी के न्यूनतम आय की गारंटी वाले बयान पर बोलते हुए मायावती ने सवालिया लहजे में कहा कि राहुल की दादी इंदिरा गाँधी के “गरीबी हटाओ वाले नारे का क्या हुआ? इतना ही नहीं उन्होंने वादाखिलाफी और गुमराह करने जैसे कई गंभीर आरोप कांग्रेस पर लगाए.


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