लखनऊ, 13 जून 2026। उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन लगभग तय हो गया है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों नेता मिलकर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। दोनों पार्टियां 2017 और बिहार जैसी पुरानी गलतियों से बचते हुए इस बार पूर्ण विपक्षी एकता के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं।
सपा ने बदली पूरी चुनावी रणनीति
समाजवादी पार्टी ने 2027 के चुनाव के लिए अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। पार्टी अब जल्दी उम्मीदवार घोषित करने और जनता के बीच लंबा समय बिताने की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन से पहले ही प्रत्याशियों की सूची जारी करने की तैयारी चल रही है, ताकि उम्मीदवार क्षेत्र में पहले से सक्रिय हो सकें।
सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति
सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर लगभग पूरी सहमति बन गई है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर करीब 200 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करने की चर्चा चल रही है। संभावना है कि पहली प्रत्याशी सूची सबसे पहले सपा ही जारी करेगी।
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बिहार वाली गलती नहीं दोहराएंगी दोनों पार्टियां
दोनों पार्टियां बिहार में हुए गठबंधन टूटने जैसी स्थिति से बचना चाहती हैं। इसलिए इस बार गठबंधन को मजबूत नींव पर खड़ा करने और चुनाव से पहले सभी मुद्दों पर स्पष्ट समझौता करने पर जोर दिया जा रहा है। विक्रमादित्य मार्ग (अखिलेश यादव का आवास) से लेकर दिल्ली तक गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
2017 से अलग होगी इस बार की रणनीति
2017 के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिली करारी हार के बाद इस बार पूरी तरह नई रणनीति अपनाई जा रही है। अखिलेश यादव ने चुनावी तैयारी को नया स्वरूप दिया है। विपक्षी एकता को मजबूत करने के साथ-साथ संगठनात्मक तैयारियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उम्मीदवारों की जल्द घोषणा का फायदा
सपा नेतृत्व का मानना है कि समय से पहले उम्मीदवार घोषित करने से वे जनता के बीच लंबे समय तक काम कर पाएंगे और स्थानीय मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा सकेंगे। पार्टी प्रत्याशियों की पहली सूची जल्द जारी कर बाकी विपक्षी दलों को भी संदेश देना चाहती है।
यूपी की सियासत में इस गठबंधन की घोषणा को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। सपा और कांग्रेस अब पूरी ताकत के साथ 2027 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।












































