लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस द्वारा किए जा रहे एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने एनकाउंटर का जातिवार आंकड़ा जारी करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस जाति और धर्म देखकर कुछ विशेष समुदायों को निशाना बना रही है।
अखिलेश का बड़ा आरोप
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2017 से अब तक हुए एनकाउंटरों में सबसे ज्यादा मुसलमानों के साथ-साथ ब्राह्मण समाज के लोगों के एनकाउंटर हुए हैं। उन्होंने कहा, “क्या यूपी में अपराधियों का एनकाउंटर उनकी जाति देखकर किया जा रहा है?”
अखिलेश यादव ने सवाल पूछा कि आखिर सबसे ज्यादा एनकाउंटर किन जातियों के लोगों के हुए हैं और क्यों?
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हालिया एनकाउंटर के उदाहरण
अखिलेश यादव ने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा:
– जौनपुर में बारात में दूल्हे की हत्या के आरोपी रवि यादव का पुलिस एनकाउंटर में मारा जाना।
– अलीगढ़ में 70-80 लूट के मामलों में शामिल रजा मोहम्मद और मुबीन का एनकाउंटर।
– गाजियाबाद कैश वैन लूटकांड के आरोपी जुबैर का एनकाउंटर।
– सुल्तानपुर ज्वेलरी लूटकांड के आरोपी मंगेश यादव और अनुज प्रताप सिंह का एनकाउंटर।
– राजस्थान-यूपी का मोस्ट वांटेड मुकेश ठाकुर और अनिल दुजाना गैंग से जुड़े बलराम ठाकुर का एनकाउंटर।
पुलिस का पक्ष
यूपी पुलिस ने 2017 से अब तक के एनकाउंटर का आंकड़ा सार्वजनिक किया है। पुलिस का कहना है कि सभी एनकाउंटर आत्मरक्षा में हुए हैं और ज्यादातर मामले लूट, हत्या, बलात्कार और संगठित अपराध से जुड़े हैं। अलीगढ़, गाजियाबाद और अन्य जगहों पर एनकाउंटर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत व्यक्त की थी।
सवालों का घेरा
अखिलेश यादव के आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अपराध की प्रकृति देखकर कार्रवाई हो रही है या अपराधी की जाति-धर्म देखकर? कई लोग पूछ रहे हैं कि जब कोई अपराधी 50-80 लूट, हत्याएं या कैश वैन लूट जैसी घटनाओं में शामिल हो तो उसका एनकाउंटर अपराध पर कार्रवाई है या जाति आधारित?
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राजनीतिक महत्व
यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ता दिख रहा है, क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। अखिलेश यादव की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सपा की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें अल्पसंख्यक और कुछ खास जातियों को साधने की कोशिश दिख रही है।
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा और यूपी सरकार की ओर से पलटवार की उम्मीद है। सरकार का रुख रहा है कि अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो। प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर यह बहस एक बार फिर गर्म हो गई है।













































