अयोध्या : राम मंदिर व्यवस्था में पूर्ण बदलाव, SBI की लापरवाही पर बोले गोविंद देव गिरि

अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महंत गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर व्यवस्था में पूर्ण बदलाव की घोषणा की है। उन्होंने SBI की लापरवाही पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बैंक को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए था। साथ ही चंपत राय पर भरोसा करने की गलती मानते हुए उनकी बेदाग छवि का बचाव किया।

गोविंद देव गिरि के प्रमुख बयान

– राम मंदिर की प्रतिष्ठा पूरी तरह बहाल करेंगे।
– संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रहने वाली नई व्यवस्था बनाई जाएगी।
– चढ़ावा व्यवस्था में SBI की भी जिम्मेदारी थी, उसकी लापरवाही के गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।
– FIR ट्रस्ट नहीं, SBI को दर्ज करानी चाहिए थी।
– चंपत राय अपराधी नहीं, सिर्फ लापरवाही हुई है। 32 साल से उन्हें जानता हूं, वे बेदाग हैं।

राजनीतिक आरोपों पर पलटवार

गोविंद देव गिरि ने कहा कि जो कभी राम की बात नहीं करते थे, वे आज राम भक्त बन गए हैं। कार सेवकों पर गोली चलाने वाले आज राम भक्त बन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी के मुद्दे को हिंदुत्व विरोधी माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कई लोग राजनीतिक स्वार्थ लेकर यहां आए हैं।

ट्रस्ट बोर्ड और नई व्यवस्था

– ट्रस्टी बोर्ड को जल्द पूरा किया जाएगा।
– नए नामों के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो इंटरव्यू लेकर नाम सौंपेगी।
– बेहतर व्यवस्था के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति होगी।
– ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ काम करेगा।

आभूषण और चढ़ावा की जानकारी

महंत गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने राम मंदिर के कुछ आभूषण प्रदर्शित किए। उन्होंने बताया कि दान में मिली 2800 वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है। पांच वस्तुएं केवल नमूने के तौर पर दिखाई गई हैं।

आर्थिक आंकड़े

ट्रस्ट को दान के जरिए 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च हो चुके हैं।
ट्रस्ट की स्थापना से 31 मार्च 2026 तक 582 करोड़ रुपये की चढ़ावा राशि प्राप्त हुई, जिसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन पर खर्च किए गए। शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है।

अगली बैठक

ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी। गोविंद देव गिरि ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग पर अडिग रहने का भी ऐलान किया। यह बयान राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद के बीच ट्रस्ट की नई दिशा और पारदर्शिता बनाए रखने का संदेश देने वाला माना जा रहा है।

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