राम मंदिर पर BJP का बिग प्लान! 40 मिनट बंद कमरे में क्या हुआ? शाह-योगी की सीक्रेट मीटिंग का पूरा सच!

आज हम बात करेंगे योगी आदित्यनाथ और अमित शाह की मुलाकात की। मंगलवार की शाम को अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में मुलाकात हुई। ये मुलाकात बड़ी थी। करीब 40 मिनट तक चली। कर्तव्य भवन के अंदर ही मुलाकात हुई। योगी आदित्यनाथ लखनऊ से दिल्ली पहुंचे थे। इस मुलाकात की तस्वीरें भी मीडिया में सामने। जिस तरीके से मुलाकात हुई आपने देखा अमित शाह के चेहरे को आपने देखा। योगी आदित्यनाथ की भाव भंगिमाओं को मुलाकात। गंभीर थी क्योंकि उत्तर प्रदेश से जो मुद्दा चल रहा है वो आने वाले संसद के सत्र में एक आग का गोला बन सकता है। मुद्दा क्या है रामजन्म?

दोनों नेता जब सामने मिल रहे हैं और संसद में आपने देखा कि इससे पहले के सत्र में अमित शाह। किस तरह से बयान देते थे। विपक्ष के मुद्दों को कैसे काउंटर करते थे। 20 तारीख से सत्र शुरू हो रहा है। मानसून सत्र शुरू हो रहा है और उससे पहले राम जन्मभूमि के मुद्दे पर मुतमईन होना चाहती है एनडीए की सरकार। नरेंद्र मोदी की सरकार और इसलिए अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की है। इस मुलाकात में। उत्तर प्रदेश की राजनीति या दिल्ली की राजनीति की चर्चा थोड़ी बहुत जरूर हुई, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर में चढ़ावा। चोरी का। इस मुद्दे पर बीजेपी का अगर कोई नेता मुखर होकर के बोल रहा है तो वो सिर्फ योगी आदित्यनाथ। पिछले कई दिनों में बार बार अलग अलग मंचों से उनके भाषण सामने आए और भाषणों में वो बार बार कहते रहे कि। चढ़ावा चोरी करने के जो आरोपी हैं उनको बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी का गठन हुआ, एफआईआर दर्ज हुई। कुछ लोग जो। इस पूरे ट्रस्ट में शामिल थे, जिनकी जवाबदेही बनती थी, उनको ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया। ट्रस्ट की अगली बैठक। 22 जुलाई को होनी है।

एक नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ट्रस्ट का पुनर्गठन भी हो रहा है। कुछ। नए सदस्यों को भी इसमें शामिल किया। इन सब के बीच बीजेपी को विपक्ष के हमलों का जवाब देना है क्योंकि इसी। राम के नाम पर पिछले तीन दशक से देश की और खासतौर पर उत्तर भारत की सत्ता चल रही थी। राजनीति चल रही थी। ऐसे में बीजेपी या एनडीए का नेतृत्व संसद में विपक्ष को कैसे जवाब दे रहा होगा, क्योंकि इससे पहले उनकी। किरकिरी हो चुकी है। अयोध्या में लोकसभा के चुनाव के हार के लिए उन्हें अवधेश प्रसाद को जो सांसद है। समाजवादी पार्टी के पार्टी सदन के बीच में उनको खड़ा कर करके बार बार यह इशारा करती की देखिए। आपने मंदिर बनवाया। आप दावा करते हैं की आप राम को लाए हैं लेकिन राम ने किसको आशीर्वाद दिया हमारी पार्टी के सांसद को। अयोध्या से तब जिताया जब आप इस बात का श्रेय ले रहे थे कि अयोध्या में राम मंदिर आपने। लेकिन स्थानीय लोग खुश नहीं थे। श्रद्धालु खुश नहीं। दुकानदार खुश नहीं था। जिनकी जमीनें ली गई, जिनके मकान। लिए गए वो खुश नहीं थे। इसलिए उन सब ने अपना छुआ भर वोट समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को दे दिया और पीडीए का गणित वहां भी काम कर गया। और आप देखिए कि किस तरीके से पिछड़ा दलित ये सब मिल कर कर के उम्मीदवार को।

समाजवादी पार्टी ने अयोध्या में जीता रहे थे और इस नाते आप का नैरेटिव फेल हो और यही नहीं बल्कि और भी लोग और भी जगहों पर आप चुनाव। आप चित्रकूट में चुनाव हारे हैं। आप इसी तरह से रामेश्वरम में चुनाव हार गए तो इन तमाम चीजों को एक पॉलिटिकल नैरेटिव के तौर पर विपक्ष बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल करता। अब जब यह बात आगे बढ़ती है, अब दो हज़ार 27 के इलेक्शन सर पर है और फिर जब बात हो रही है तो बात क्या हो रही है। बात हो रही है कि रामजन्मभूमि में चढ़ावा है कि बीजेपी की सरकार दिल्ली में लखनऊ में होते हुए। हुआ तो अब बीजेपी को इसका जवाब देना है। तो दो ऐसे महत्वपूर्ण स्तंभ बीजेपी के रणनीति के दो महत्वपूर्ण स्तंभ। दिल्ली में अमित शाह ने संसद में विपक्ष को काउंटर करते हैं और दूसरे योगी आदित्यनाथ जो राजनीतिक मंचों से भी। काउंटर करते हैं और विधानसभा के पटल पर तो दोनों एक साथ थे। 40 मिनट की मुलाकात हुई और इस मुलाकात में। मुद्दे को एक तरीके से कहा जाए तो पूरी तरीके से नेस्तनाबूद कैसे किया जाए, कैसे विपक्ष को काउंटर किया जाए? क्या हमले किए जाएं, कौन से ऐसे मुद्दे छोड़े जाएं ताकि विपक्ष बैकफुट पर आए। जैसे योगी आदित्यनाथ ने। बीकापुर की सभा में क्या कह दिया था? आप खुद भाषण सुन लीजिए। कल्पना करिए। क्या कोई जामा मस्जिद में कभी। हनुमान चालीसा का पाठ कर पाएगा क्या? क्या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस करवा पाएगी? अगर नहीं करा पाएगी तो यह पाप क्यों करवाया गया था? अयोध्या में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का पाप? क्यों करवाया गया था?

योगी ने दो हज़ार तीन के उस मुद्दे को उछाल दिया और अगले दो तीन दिनों तक उस मुद्दे पर चर्चा होती रही। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की कोशिश की गई थी। जब मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी। ताकि उनका जो अपना मतदाता है, जो शायद इस चढ़ावा की प्रक्रिया से नाराज है, उसकी नाराजगी थोड़ी सी ठंडी हो। उसको लगे कि भई मंदिर बनाया तो बीजेपी के लोगों ने या बीजेपी के समर्थन में बीजेपी की सरकार रहते हुए। इसका मार्ग प्रशस्त हुआ है। भले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ। अगर गैर बीजेपी सरकार होती तो शायद यह नामुमकिन होता। तो जो गुस्सा है वह गुस्सा रहे जरूर, लेकिन वह दूसरे के प्रति सहानुभूति या समर्थन में तब्दील हो जाए, यह बीजेपी की कोशिश है और इसीलिए योगी आदित्यनाथ और अमित शाह 40 मिनट तक बंद कमरे में एक दूसरे के साथ। ना कोई फाइल होती है, ना कोई दस्तावेज होता है, ना कोई कागज होता है, ना कोई इस तरह का निर्णय होता है वहां। चर्चा होती है कि क्या करना है, किस तरह आगे बढ़ाना है, क्या जवाब देना है, सभाओं में जाना है तो क्या कहना है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाना है तो क्या कहना है? किसी समाचार चैनल के मंच पर जाना है तो इस मुद्दे पर क्या कहना है? और। संसद में जवाब देना है। तो क्या एक तरफ योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में कमान संभालेंगे कि राम और राम का मुद्दा। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक दो हज़ार 27 में विधानसभा के चुनाव होंगे। यह नैरेटिव उल्टा ना हो जाए इसलिए योगी। को कॉन्फिडेंस योगी को आगे रखना है क्योंकि बीजेपी को भी लगता है कि इस पूरे मामले में जरूर संघ परिवार। वीएचपी या इस तरीके के एलायंस थॉट प्रोसेस के लोगों की क्रेडिबिलिटी कमजोर हुई है। लेकिन आज भी योगी। के प्रति लोगों का विश्वास है। उस विश्वास को आगे रख कर के बीजेपी यह कोशिश कर रही है इस मुद्दे को। यूपी में काउंटर करें और दिल्ली में अमित शाह जब संसद में बोल रहे हैं तो उनके पास यह सारे रेफ्रेंस। हों कि दो हज़ार 3 में क्या हुआ था, 1990 में क्या हुआ था, 1992 में क्या हुआ था? बार बार अलग अलग तारीखों पर अलग अलग मौकों पर किस तरीके के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ? किस तरीके से सांप्रदायिक हिंसा हुई? कैसे घटनाएं हुई या दो हज़ार 12 से 17 के बीच में यूपी में कैसी सरकार चलती थी? समाजवादी किस तरह का नैरेटिव था? कैसे 14 के मुजफ्फरनगर के दंगे हुए, कैसे अयोध्या का दंगा हुआ? किस तरीके से मुरादाबाद का दंगा, कैसे मेरठ का दंगा?

उन दंगों की बात, गोधरा के दंगों की बात। किस तरह के मुद्दे उछालकर जो भावनात्मक तौर पर बहुसंख्यक समाज। नाराज हुआ अयोध्या के चढ़ावा चोरी के मामले पर उसको उसकी सहानुभूति को वापस अपने खेमे में लाया जाए। अपने पक्ष में लाया जाए और दो हज़ार 27 से पहले उसको किसी तरह के विरोध या किसी तरह के आक्रोश में न तब्दील हो। समाजवादी पार्टी इसके उलट उत्तर प्रदेश में सॉफ्ट हिंदुत्व का चेहरा प्रस्तुत करती है। वह एक सनातन धर्म की तरह। तमाम मंदिरों में अखिलेश यादव आपको दिखाई पड़ते हैं। उनकी पत्नी डिंपल यादव दिखाई पड़ती है। उनके बच्चे। दिखाई पड़ रहे हैं कभी बनारस की आरती में, कभी बाबा विश्वनाथ के कॉरिडोर में, कभी वृंदावन में, कभी मथुरा में। अलग अलग जगहों और अखिलेश यादव तो आपको पता है केदारेश्वर का मंदिर बनवा रहा है इटावा में तो बार बार उसका जिक्र करते। बार बार उसकी तस्वीर भी पोस्ट करते हैं और वो कह रहे हैं कि जब मंदिर बन जाएगा उसके बाद वो सपरिवार अयोध्या में दर्शन करने जाएंगे। पर क्या वह दर्शन दो हज़ार 27 से पहले होगा या दो हज़ार 27 के चुनाव के बाद होगा?

यह बड़ा दिलचस्प है। तो वह भी सॉफ्ट हिंदुत्व के साथ चल रहे फिर शंकराचार्य जी का मुद्दा है। यह भी एक ऐसा मुद्दा है जिसको लेकर के बीजेपी के अंदर भी कई तरह के विचार चल। अब शंकराचार्य जी उत्तर प्रदेश में आपको पता है किस तरीके से उनकी सभाएं हो रही हैं, उनके कार्यक्रम हो रहे हैं गोरक्षा को लेकर के वह क्या कह रहे हैं और कैसे कुंभ के मुद्दे को लेकर के किस तरह से उनके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तनातनी हुई उसको समाजवादी पार्टी अपनी तरफ इस्तेमाल कर। उनके कार्यकर्ता, उनके नेता, शंकराचार्य जी के कार्यक्रम अलग अलग जगहों पर एक नैरेटिव देने की कोशिश कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भी प्रोडक्शन बहुत ज्यादा हो रहा है। वो ये नैरेटिव दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में गौ हत्या हो रही है। यह दिखाने के अखिलेश यादव उनके चरणों में जाकर बैठे हैं। मतलब वह सॉफ्ट हिंदुत्व का अपना एक चेहरा सामने प्रस्तुत कर अखिलेश यादव की सभाओं में, उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, उनके कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर हिंदू साधु संत वहां पर मौजूद रहते हैं, उनको मालाएं पहना रहे हैं, उनको पटके पहना रहे हैं।

उनको भगवा, नारंगी इस तरह के वस्त्रों में कई बार देखा जा रहा है जो उनको सम्मानित करने के लिए उनके साथ उनके मिलने जुलने वाले लोग ले करके तस्वीरें। भगवान की तमाम सारी ऐसी चीजें और इस मुद्दे पर सबसे पहले अखिलेश यादव ने ही एक यह भी दुखती थी। इन तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए योगी और अमित शाह एक साथ बंद कमरे में 40 मिनट तक क्या कुछ निकलकर आया यह अगले कुछ दिनों में जब संसद का सत्र चल रहा होगा, अमित शाह भाषण दे रहे होंगे या योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश की सभाओं में जा रहे होंगे तो ज्यादा स्पष्ट। पिछले कुछ दिनों में यानी पिछले कुछ 24 48 घंटों में योगी आदित्यनाथ ने कुछ मीडिया कॉन्क्लेव को भी संबोधित है और उनमें भी जो उनकी भाषा थी, जो हमले थे, वह इस बात का इशारा करते हैं कि उनको ग्रीन सिग्नल है सेंट्रल लीडरशिप से कि आपको ऐसे ही आगे इसी एग्रेशन के साथ आगे बढ़ना। यह एग्रेसिव डिफेंस का मामला है और एग्रेसिव डिफेंस का मेकैनिज्म लेकर के बीजेपी आगे चलने जा रही है।

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