फर्रुखाबाद : रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास एवं चौड़ीकरण कार्य के बीच रेलवे लाइन के निकट स्थित एक मज़ार को लेकर विवाद गहरा गया है। रेलवे अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बन गई, जिससे मामला चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य के तहत रेलवे की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है। इसी क्रम में रेलवे लाइन के पास स्थित एक मज़ार को भी अतिक्रमण की श्रेणी में मानते हुए हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन के चौड़ीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए संबंधित भूमि की आवश्यकता है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन का कायाकल्प किया जा रहा है, जिसके तहत प्लेटफॉर्म, पार्किंग, प्रवेश द्वार और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। ऐसे में रेलवे की भूमि पर बने किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को हटाना आवश्यक है।
मामले को लेकर क्षेत्र की राजनीति भी गर्मा गई है। फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में बाधा बनने वाले किसी भी अतिक्रमण को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रेलवे और प्रशासन कानून के दायरे में रहकर कार्यवाही करेंगे तथा जनहित से जुड़े विकास कार्य किसी भी कीमत पर नहीं रुकने दिए जाएंगे।
सांसद ने कहा कि रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण से जिले के लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।
वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानीय लोग मज़ार को धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए इसे हटाने का विरोध कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
फिलहाल प्रशासन और रेलवे विभाग पूरे मामले में कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए या फिर विवादित धार्मिक ढांचे को यथावत रखा जाए? इस मुद्दे पर लोगों की राय भी बंटी हुई दिखाई दे रही है।
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