डिलीवरी बॉय के बैंक खाते से 9 महीने में 130 करोड़ का ट्रांजेक्शन, रोजाना 50 लाख से 3.50 करोड़ तक का लेन-देन; साइबर सेल को 20 और खाते मिले, दो आरोपी गिरफ्तार

कानपुर : कानपुर में एक डिलीवरी बॉय के बैंक खाते की जांच में साइबर सेल को चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मात्र 9 महीनों में इस खाते से 130 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें रोजाना कम से कम 50 लाख से लेकर 3.50 करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन किया जाता था। पुलिस की रडार पर अब ऐसे 20 और खाते आए हैं। आरोपी डिलीवरी बॉय को महज 9 हजार रुपये मासिक देकर उसके खाते, डेबिट कार्ड और दस्तावेज अपने कब्जे में रख लिए थे। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

डिलीवरी बॉय का खाता बना मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया

बेकनगंज के पेचबाग निवासी ओवेस नामक डिलीवरी बॉय ने साल 2024 में कमला टॉवर स्थित एचडीएफसी बैंक की मुख्य शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया था। साइबर सेल प्रभारी तनुज सिरोही ने बताया कि इस खाते में मात्र 9 महीने के अंदर 130 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हो गया।

आरोपी मो. अमान और मो. वसीउद्दीन उर्फ सरताज ने ओवेस का डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक और बैंक में रजिस्टर्ड सिम कार्ड अपने पास रख लिया था, ताकि उसे खाते में हो रहे लेन-देन की कोई जानकारी न मिल सके।

9 हजार रुपये मासिक किराए पर लिया खाता

ओवेस को खाता देने के बदले आरोपी उसे हर महीने महज 9 हजार रुपये देते थे। कुछ समय बाद जब ओवेस ने अपने बैंक दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपी टालमटोल करने लगे। शक होने पर ओवेस खुद बैंक पहुंचा और खाते की डिटेल चेक की तो पता चला कि 6 महीने में ही 35 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है।

इसके बाद उसने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में आंकड़े और भी हैरान करने वाले निकले — 9 महीने में देशभर की करीब 19 फर्मों से 130 करोड़ रुपये इस खाते में आए और रोजाना 50 लाख से 3.50 करोड़ रुपये तक की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई।

Also Read: लखनऊ: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व ब्रांच मैनेजर नितिन चौधरी गिरफ्तार, दिल्ली से STF ने दबोचा,  मुद्रा बैंक लोन घोटाले से जुड़ा मामला 

पुलिस के हाथ लगी 250 पेज की ट्रांजेक्शन शीट

साइबर टीम को अब तक 9 महीने की 250 पेज की ट्रांजेक्शन शीट मिली है। जांच में सामने आया कि खाते में मंडी परिषद का आढ़त लाइसेंस जमा किया गया था, जिसकी वजह से अनलिमिटेड ट्रांजेक्शन और टीडीएस में छूट मिल रही थी। पुलिस अब इस लाइसेंस की सत्यता की जांच कर रही है कि वह फर्जी था या नहीं।

20 और खाते पुलिस की रडार पर

पुलिस को अब तक 20 ऐसे खाते मिल चुके हैं, जिनमें ओवेस के खाते से रकम भेजी जाती थी और फिर वहां से कैश निकाला जाता था। साइबर सेल ने सभी संबंधित बैंकों से इन खातों की पूरी डिटेल मांगी है।

आरोपी कैसे फंसाते थे बेरोजगारों को

स्वाट टीम प्रभारी शिव कुमार मौर्या ने बताया कि मो. अमान और सरताज एक ही इलाके के रहने वाले हैं। दोनों ओवेस को ज्यादा पैसे कमाने का झांसा देकर जाल में फंसाया। वे बेरोजगार युवकों को नौकरी और लोन का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे, उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे। फिर खातों के सभी दस्तावेज अपने कब्जे में रखकर बड़ी-बड़ी रकम ट्रांसफर करते और कैश का बंटवारा कर लेते थे।

Also Read : लखनऊ पेंशन घोटाला, 1.42 करोड़ की हेराफेरी में कोषागार की तत्कालीन लेखाकार रेणुका बर्खास्त

गिरफ्तारी और बरामदगी

शक होने पर ओवेस ने स्वरूप नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने डपकेश्वर धाम के पास से मो. अमान और मो. वसीउद्दीन उर्फ सरताज को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक नोट गिनने की मशीन, दो फर्मों के बैनर, 39 ब्लैंक चेक, दो किरायेदारीनामा, दो एग्रीमेंट, एक सहमति पत्र और तीन आधार कार्ड बरामद किए हैं। आरोपियों में अमान बीकॉम अंतिम वर्ष का छात्र है, जबकि सरताज बीए पास है। दोनों पर धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

डीसीपी का बयान

डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी बेरोजगार युवकों को टारगेट करते थे और उनके बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया) के रूप में इस्तेमाल करते थे। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी के पास और कितने ऐसे खाते हैं और रकम आखिर कहां से आ रही थी।

यह मामला एक बार फिर बैंकों की लापरवाही और बड़े स्तर पर चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट की ओर इशारा करता है। साइबर सेल की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)