जनगणना में ड्यूटी दे रहे रायबरेली के शिक्षकों का बड़ा ऐलान, बोले- बिना उपार्जित अवकाश के नहीं बनेगी बात

रायबरेली : भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में जब पूरी दुनिया ग्रीष्मावकाश का आनंद ले रही है, तब जिले के शिक्षक ‘राष्ट्रीय दायित्व’ के नाम पर घर-घर जाकर सिर गिनने में व्यस्त हैं। अपनी छुट्टियों की ‘कुर्बानी’ दे रहे इन गुरुजी ने अब अपने हक के लिए मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (शाखा-रायबरेली) का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला की अगुवाई में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल सिंह से मिला और जमकर अपनी बात रखी।

छुट्टी की ‘बलि’ पर मांगा उपार्जित अवकाश

​प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि जनगणना जैसा महत्वपूर्ण कार्य पूरी निष्ठा से किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले शिक्षकों को उपार्जित अवकाश (Earned Leave) मिलना ही चाहिए।जिलाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पूरी सक्रियता से जुटे हैं। प्रशासन को भी उनकी मेहनत का सम्मान करना चाहिए। जिलामंत्री मुकेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में काम लेने से शिक्षकों का निजी समय छिन गया है, जिससे उनमें भारी असंतोष है। आखिर मेहनत का हक तो मिलना ही चाहिए।

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मनोबल गिरा तो कैसे होगा काम?

​शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे काम से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। ​वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि शिक्षक हमेशा राष्ट्रहित में खड़े रहे हैं, लेकिन क्या उनके अधिकारों का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। संयुक्त मंत्री ​डॉ. चंद्रमणि बाजपेई ने तर्क दिया कि यदि उपार्जित अवकाश स्वीकृत होता है, तो शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में भी प्रशासनिक कार्यों में इसी ऊर्जा के साथ सहयोग करेंगे।


ये रहे मौके पर मौजूद

​ज्ञापन सौंपने के दौरान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, जनपदीय कोषाध्यक्ष सुधीर सिंह, डलमऊ मंत्री अभिषेक मिश्र, डलमऊ वरिष्ठ उपाध्यक्ष कीर्तिमनोहर शुक्ल, अमावा मंत्री अशोक पाल और प्रभंजन मिश्रा समेत भारी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

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