मथुरा: 9 अगस्त को नहीं होगी कार सेवा, फलाहारी महाराज ने किया साफ, बोले- अदालत के फैसले का करें इंतजार

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण को लेकर 9 अगस्त को प्रस्तावित कार सेवा की चर्चाओं के बीच याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को किसी भी तरह की कार सेवा नहीं की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांति, संयम और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। फलाहारी महाराज के मुताबिक मामला प्रयागराज हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सभी को न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

न्यायालय पर जताया पूरा भरोसा

दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि प्रकरण से संबंधित प्राचीन साक्ष्य वर्ष 2021 में ही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। ऐसे में अब इस मामले में आगे का निर्णय अदालत की प्रक्रिया और उसके आदेश के आधार पर होना है।

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आश्रम में होंगे धार्मिक अनुष्ठान

उन्होंने बताया कि चित्रगुप्त पीठ से जुड़े सच्चिदानंद महाराज ने भी 9 अगस्त को लेकर स्थिति साफ की है। उनके अनुसार उस दिन उनके आश्रम में केवल हवन, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। किसी प्रकार की कार सेवा का कार्यक्रम नहीं है। इस स्पष्टीकरण के बाद 9 अगस्त को कार सेवा को लेकर चल रही चर्चाओं पर काफी हद तक स्थिति साफ हो गई है।

अफवाहों से बचने की अपील

फलाहारी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा आस्था और भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय है। ऐसे में सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने वालों को शासन-प्रशासन की ओर से नोटिस भी दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी भ्रामक सूचना को आगे प्रसारित करने से बचें।

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कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर

फलाहारी महाराज ने कहा कि प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और पूरा मामला न्यायिक विचाराधीन है। इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं और आम लोगों से संयम बरतने तथा किसी भी तरह के विवाद या टकराव से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय को करना है और सभी को उसी का इंतजार करना चाहिए।

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