कायमगंज, फर्रुखाबाद : सड़क पर लगा जाम एक बार फिर लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ता नजर आया। इस बार जाम में फंसी 102 एंबुलेंस में प्रसूता का सुरक्षित प्रसव कराना पड़ा। गनीमत रही कि एंबुलेंस में मौजूद ईएमटी, पायलट और साथ चल रही महिलाओं की सूझबूझ से जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। लेकिन यह घटना प्रशासन की यातायात व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि किसी गंभीर मरीज या दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए जा रही एंबुलेंस इसी तरह जाम में फंस जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
रविवार को कंपिल थाना क्षेत्र के बहलोलपुर गांव निवासी शक्ति सिंह की पत्नी सविता को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने 102 एंबुलेंस को सूचना दी। एंबुलेंस उन्हें लेकर कायमगंज अस्पताल के लिए रवाना हुई, लेकिन पितौरा-बेरिया मोड़ के पास भारी जाम में फंस गई। काफी देर तक जाम नहीं खुला और इसी दौरान प्रसूता की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एंबुलेंस में तैनात ईएमटी बलराम सिंह ने पायलट विजेंद्र और साथ मौजूद महिलाओं के सहयोग से एंबुलेंस के भीतर ही सुरक्षित प्रसव कराया। सविता ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। जाम खुलने के बाद जच्चा-बच्चा को कायमगंज अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को स्वस्थ बताया। परिजनों के अनुसार यह सविता का दूसरा पुत्र है।
ईएमटी बलराम सिंह ने बताया कि यदि रास्ते में जाम नहीं लगा होता तो प्रसूता को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। मजबूरी में एंबुलेंस को ही अस्थायी प्रसव कक्ष बनाना पड़ा।
प्रशासन से बड़ा सवाल
कायमगंज और आसपास के क्षेत्रों में जाम की समस्या अब आम हो चुकी है। बाजारों और मुख्य चौराहों पर ई-रिक्शा, ऑटो और अव्यवस्थित वाहनों की भरमार के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन जामों में एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी फंस जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस एंबुलेंस में प्रसूता की जगह कोई हार्ट अटैक, स्ट्रोक या गंभीर दुर्घटना का मरीज होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या के स्थायी समाधान की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ई-रिक्शा संचालन पर क्यों नहीं बनती व्यवस्था?
नगर में बिना ठोस यातायात योजना के बड़ी संख्या में ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। कई प्रमुख मार्गों पर मनमाने ढंग से वाहन खड़े किए जाते हैं, जिससे आए दिन जाम लगता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को ई-रिक्शा के लिए निर्धारित रूट, स्टैंड और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए, ताकि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन बिना किसी बाधा के निकल सकें। यह घटना भले ही सुखद अंत के साथ समाप्त हुई हो, लेकिन इसने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगली बार शायद इतनी किस्मत साथ न दे।
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