यूपी: दिवंगत कांस्टेबल हनीफ की मौत के 6 साल बाद असाधारण पेंशन का प्रस्ताव भेजे जाने से सरकार नाराज, कहा- DGP तय करें दायित्व

उत्तर प्रदेश सरकार ने ड्यूटी के दौरान दिवंगत पुलिसकर्मियों की असाधारण पेंशन के प्रस्ताव भेजने में देरी किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने इस बाबत शासनदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि प्रस्ताव तय समय सीमा में ही भेजे जाएं।


अधिकारियों और कर्मचारियों का दायित्व तय करें डीजीपी

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने कहा है कि ऐसे मामले संबंधित पुलिसकर्मी की मृत्यु की तिथि से अधिकतम दो साल की अवधि में प्रस्तुत कर दिए जाएं। उन्होंने ललितपुर जिले के एक प्रकरण पर नाराजगी जाहिर की है, जिसमें आरक्षी हनीफ की मौत के छह साल बाद असाधारण पेंशन का प्रस्ताव भेजा जा सका है।


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प्रमुख सचिव गृह ने शासनादेश को डीजीपी को संदर्भित करते हुए उनसे अपेक्षा की है कि इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का दायित्व तय किया जाए। जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों में एक-दो ऐसे मामले संज्ञान में आये हैं कि वर्षों से कोमा में चल रहे पुलिसकर्मी का परिवार बेहद कठिनाई में जी रहा है। जिसके बाद योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में कर्तव्य पालन के दौरान गंभीर दुर्घटना के कारण किसी पुलिसकर्मी के लंबे समय तक कोमा में रहने पर उसके आश्रित को असाधारण पेंशन का लाभ दिए जाने का फैसला लिया था।


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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला किया गया था। उस दौरान बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2015 में संशोधन को मंजूरी दी गई।


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