राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा आगे कुआं, पीछे खाई;गिरिराज सिंह ने किया पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से कपास उगाने वाले किसानों और कपड़ा उद्योग पर उल्टा असर पड़ेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शनिवार को अपने वीडियो पोस्ट में राहुल ने आरोप लगाया कि 18% टैरिफ बनाम 0% समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं, और किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।

पोस्ट में राहुल ने कहा कि बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है – शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें। राहुल ने बताया कि भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया – अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी। आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई? और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है – या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल? पोस्ट में राहुल बोले अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा। और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।

भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।
एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स – दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती। लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।

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वहीं राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हमेशा की तरह, तथ्यों को समझे बिना वह गलत जानकारी फैला रहे हैं। सच्चाई यह है कि भारत ने अपने कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं बेहतर और संतुलित व्यापार समझौता किया है। यह समझौता औद्योगिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ हमारे किसानों के हितों की रक्षा के लिए समग्र रूप से तैयार किया गया है। भारत का कपास निर्यात आज पहले से कहीं अधिक मजबूत और विविध है।

गिरिराज सिंह ने कहा कि हम केवल एक बाजार पर निर्भर नहीं हैं। आज, भारत के वस्त्र निर्यात में 100 से अधिक देशों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो हमारी वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लचीलेपन, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान और अन्य रणनीतिक साझेदारों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में निरंतर प्रगति के साथ, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हमारे निर्यातकों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।

INPUT-ANANYA MISHRA

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