गोरखपुर : दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सोसायटी फॉर प्लांट बायोकेमिस्ट्री एंड बायोटेक्नोलॉजी (SPBB), नई दिल्ली के सहयोग से 22 से 24 जून 2026 तक “पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी (Recombinant DNA Technology) एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स” विषय पर तीन दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक आणविक जीवविज्ञान तकनीकों तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है, जो वर्तमान जैविक अनुसंधान में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। यह कार्यक्रम एम.एससी., पीएच.डी. शोधार्थियों, शोधकर्ताओं तथा शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा।
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संरक्षण तथा विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अजय सिंह के मार्गदर्शन में किया जाएगा। कार्यशाला के संयोजक प्रो. दिनेश यादव, अध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं निदेशक, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ (R&D Cell) होंगे, जबकि डॉ. पवन कुमार दोहरे आयोजन सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्रो. नागेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व राष्ट्रीय प्रोफेसर एवं पूर्व बी.पी. पाल चेयर, एनआईपीबी-आईएआरआई, नई दिल्ली, मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) के रूप में संबोधित करेंगे। वे “जीनोम एडिटिंग में जीनोमिक्स की भूमिका (Role of Genomics in Genome Editing)” विषय पर व्याख्यान देंगे तथा कृषि जैव प्रौद्योगिकी एवं आणविक अनुसंधान के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव साझा करेंगे।
कार्यशाला की प्रमुख विशेषता पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी (RDT) की व्यावहारिक प्रशिक्षण श्रृंखला होगी, जिसका संचालन डॉ. ऐमन तनवीर, विषय विशेषज्ञ, आईएएनएस, डीडीयूजीयू द्वारा किया जाएगा। प्रतिभागियों को प्लास्मिड आइसोलेशन, जीनोमिक डीएनए आइसोलेशन, डीएनए की मात्रात्मक एवं गुणात्मक जांच, एगारोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, पीसीआर सेटअप, क्लोनिंग रणनीतियों, ट्रांसफॉर्मेशन तकनीकों, कॉलोनी पीसीआर तथा पॉजिटिव क्लोन्स की पुष्टि जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कार्यशाला का बायोइन्फॉर्मेटिक्स मॉड्यूल ऑनलाइन माध्यम से डॉ. वर्षा रानी, अध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, एसओईटी, संदीप विश्वविद्यालय, नासिक द्वारा संचालित किया जाएगा। प्रतिभागियों को जैविक डाटाबेस, न्यूक्लियोटाइड एवं प्रोटीन अनुक्रमों की प्राप्ति, प्राइमर डिज़ाइनिंग, रेस्ट्रिक्शन मैपिंग, होमोलॉजी सर्च, मल्टीपल सीक्वेंस एलाइनमेंट, फाइलोजेनेटिक विश्लेषण, होमोलॉजी मॉडलिंग, मॉलिक्यूलर डॉकिंग एवं विज़ुअलाइज़ेशन जैसी आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला में विभिन्न प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। डॉ. गौरव राज द्विवेदी, वैज्ञानिक-ई, आईसीएमआर-आरएमआरसी, गोरखपुर, “पीसीआर से एनजीएस तक: बायोमॉलिक्यूल्स के रहस्यों को समझना” विषय पर व्याख्यान देंगे। डॉ. राजीव सिंह, वैज्ञानिक-डी, आईसीएमआर-आरएमआरसी, गोरखपुर, “अगली पीढ़ी की जीन पहचान में CRISPR-Cas की भूमिका” विषय पर चर्चा करेंगे। प्रो. उमेश यादव, वरिष्ठ प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, डीडीयूजीयू, “बायोमॉलिक्यूलर सिमुलेशन एवं ड्रग डिज़ाइन” विषय पर व्याख्यान देंगे, जबकि डॉ. मनीष प्रताप सिंह, सहायक प्रोफेसर, प्राणी विज्ञान विभाग, डीडीयूजीयू, “व्यक्तिगत चिकित्सा में ट्रांसक्रिप्टोमिक्स” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, यह कार्यशाला सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुसंधान कौशल के बीच की दूरी को कम करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे प्रतिभागियों को अत्याधुनिक आणविक जीवविज्ञान एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके शोध एवं अकादमिक विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
कार्यशाला हेतु पंजीकरण 20 जून 2026 तक खुला है तथा इसमें केवल 50 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा।













































