शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रविवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध को लेकर केंद्र सरकार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस संकट के बीच भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी और भूमिका लगभग खत्म होती दिखाई दे रही है। राउत ने यह बात शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना के साप्ताहिक कॉलम ‘रोकठोक’ में लिखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में ईरान और इस्राइल के बीच बढ़े तनाव और अमेरिका की भूमिका के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई है और भारत एक देश के तौर पर इस स्थिति में पूरी तरह से अपना वजूद खो चुका है।
राउत के मुताबिक, इस पूरे संकट में भारत को आगे आकर युद्ध रोकने की कोशिश करनी चाहिए थी, क्योंकि यह एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है। लेकिन भारत की तरफ से इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने भारतीय नेतृत्व की कमजोरी भी उजागर हो रही है। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट पर अब तक एक शब्द भी नहीं कहा है।
संजय राउत ने अमेरिका और इस्राइल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इस्राइल दुनिया में दबंगई दिखा रहे हैं और खुद को सबसे ताकतवर समझते हैं। राउत के अनुसार, इन देशों को लगा कि वे ईरान को बहुत आसानी से हरा देंगे। उन्होंने कहा कि इस्राइल और अमेरिका को लगा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा। युद्ध के दौरान ईरान के कई बड़े नेता और सैन्य अधिकारी भी मारे गए, लेकिन इसके बावजूद ईरान लगातार जवाबी हमला कर रहा है और युद्ध जारी है।
राउत ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इस्राइल दुनिया के ग्लोबल बुली की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वहीं उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश, जो पहले अपनी बहादुरी की बात करते थे, अब इन देशों के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। अपने लेख में राउत ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच भारत को मजबूत और स्वतंत्र रुख अपनाना चाहिए था, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इसी वजह से उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका कमजोर नजर आ रही है।
INPUT-ANANYA MISHRA














































