बिजली के नये प्लांट लगाना आपके बस की नहीं..’, यूपी में बिजली संकट पर अखिलेश यादव का BJP पर हमला

उत्तर प्रदेश में इस समय तेज गर्मी के साथ बिजली संकट भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में लगातार बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। दिन और रात में हो रही अघोषित कटौती के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं।

अखिलेश यादव का एक्स पोस्ट 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार न तो नए बिजली संयंत्र स्थापित कर पाई और न ही बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार बिजली परियोजनाएं शुरू नहीं कर सकती थी, तो कम से कम बड़े पावर प्लांटों की घोषणाएं ही कर देती, जिससे गर्मी से परेशान जनता को कुछ मानसिक राहत मिल जाती। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में बिजली की मांग और बिजली दरें तो लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आपूर्ति व्यवस्था मजबूत नहीं हो पा रही है।

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उपभोक्ताओं की बढ़ीं परेशानियां

भीषण गर्मी के दौरान बिजली पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। ऐसे समय में लगातार कटौती, फॉल्ट और नई वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं की समस्याएं और गंभीर हो गई हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग घंटों बिजली न आने से परेशान हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा विद्युत व्यवस्था बढ़ती मांग को संभालने में सक्षम नहीं दिख रही है।

बिजली व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

उन्होंने जानकारी दी कि मार्च 2025 तक प्रदेश में 132 केवी के लगभग 480 सब-स्टेशन संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 69,529 एमवीए बताई गई है, जो किलोवाट में लगभग 6 करोड़ 25 लाख से अधिक बैठती है। दूसरी ओर राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 3 करोड़ 73 लाख से ज्यादा हो चुकी है, जबकि कुल संयोजित भार लगभग 8 करोड़ 57 लाख किलोवाट तक पहुंच गया है। इसके अलावा वर्ष 2024-25 में 33 केवी स्तर पर डिस्कॉम की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता भी सीमित बताई जा रही है। पीक आवर्स में जब बिजली की खपत अचानक बढ़ जाती है, तब पूरा सिस्टम ओवरलोड हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि करीब 15 प्रतिशत बिजली चोरी का अतिरिक्त दबाव भी व्यवस्था को कमजोर कर रहा है।

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24 घंटे बिजली के लिए क्षमता बढ़ाने की जरूरत

ऊर्जा विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन और वितरण क्षमता में बड़े स्तर पर वृद्धि जरूरी है। उनका कहना है कि यदि बिजली क्षमता में करीब दो करोड़ किलोवाट की बढ़ोतरी की जाए, तभी प्रदेश को स्थायी रूप से 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।

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