फर्रुखाबाद : शहर के कादरीगेट क्षेत्र स्थित वेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान एक प्रसूता की मौत हो जाने से शाम हड़कंप मच गया। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और चिकित्सकों व अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मामले की सूचना पुलिस को भी दी गई, लेकिन बाद में स्थानीय गणमान्य लोगों की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। इसके बाद परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को अपने गांव ले गए।
जानकारी के अनुसार एटा जनपद के अलीगंज थाना क्षेत्र के ग्राम मधुपुर खुर्द निवासी 35 वर्षीय गुंजन शर्मा पत्नी शिवम शर्मा ने 20 मई को बढ़पुर स्थित एक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। बताया गया कि शुक्रवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और पेट में तेज दर्द होने लगा। इसके बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए कादरीगेट स्थित वेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
परिजनों के अनुसार दिनभर उपचार चलता रहा, लेकिन शाम करीब सात बजे गुंजन की हालत अचानक गंभीर हो गई और उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
मृतका के पति शिवम शर्मा और अन्य परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन कई बार बुलाने के बावजूद डॉक्टर समय पर देखने नहीं पहुंचे। उनका कहना था कि अस्पताल स्टाफ मरीज के पास जाने से भी रोकता रहा और केवल ऑक्सीजन लगाकर उपचार का दिखावा किया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गंभीर स्थिति के बावजूद अस्पताल प्रबंधन लगातार पैसे जमा कराने का दबाव बनाता रहा।
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वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। अस्पताल की ओर से डॉ. विपुल अग्रवाल ने बताया कि महिला को सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही हाई रिस्क कंसेंट पर भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी और शाम को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों को किसी उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन परिजन मरीज को कहीं और ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया।
घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही कुछ संभ्रांत लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई। काफी देर चली वार्ता के बाद लिखित समझौता हो गया। समझौते के चलते परिजनों ने किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की और पोस्टमार्टम कराए बिना ही एंबुलेंस के माध्यम से शव को अपने पैतृक गांव ले गए।
प्रसूता की मौत और उसके बाद अस्पताल में हुए हंगामे की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि समझौता हो जाने के कारण मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।














































