गोरखपुर : मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर में सात जनपदों के पुलिस अधिकारियों के लिए “साइबर फॉरेंसिक टूल्स” विषय पर एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम (द्वितीय बैच) शुरू हो गया है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय और गोरखपुर जोन पुलिस के बीच हस्ताक्षरित एमओयू के तहत तथा साइंट टेक्नोलॉजीज, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री अरुण कुमार एस., अपर पुलिस अधीक्षक तथा विशिष्ट अतिथि श्री उपेन्द्र कुमार सिंह, साइबर कमांडो, गोरखपुर जोन पुलिस द्वारा किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा और पुलिस महानिरीक्षक, गोरखपुर जोन श्री मुथा अशोक जैन के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है।
बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने की तैयारी
मुख्य अतिथि अरुण कुमार एस. ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल फॉरेंसिक्स, डिस्क फॉरेंसिक्स, क्रिप्टोकरेंसी, वीडियो और ऑडियो फॉरेंसिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का ज्ञान पुलिस अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एमएमएमयूटी का साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर पुलिस को जटिल साइबर मामलों की वैज्ञानिक जांच के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।
सात जनपदों के 24 अधिकारी हो रहे प्रशिक्षित
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बहराइच, संत कबीर नगर, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर और श्रावस्ती जनपदों से कुल 24 पुलिस अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, साइबर स्टॉकिंग और पहचान चोरी जैसे अपराध चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने साइबर फॉरेंसिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
ये तकनीकें सिखाई जाएंगी
समन्वयक डॉ. बी.के. शर्मा और डॉ. विमल कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा:
– मोबाइल, कंप्यूटर एवं नेटवर्क फॉरेंसिक्स
– मल्टीमीडिया विश्लेषण
– ड्रोन एवं वीडियो फॉरेंसिक्स
– वॉयस एनालिटिक्स
– स्टेगनोग्राफी, पासवर्ड रिकवरी
– डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण
प्रशिक्षण नवीन सिंह (साइंट टेक्नोलॉजीज), डॉ. विमल कुमार और डॉ. बी.के. शर्मा द्वारा दिया जाएगा।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 जून से 5 जून 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।














































