गोण्डा : बड़ी खबर गोण्डा से है, जहां एक बार फिर न्याय की मांग को लेकर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न करने से आहत होकर युवक ने यह कदम उठाया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना का विवरण
जिले के परसपुर थानाक्षेत्र अंतर्गत बहुवन मदार माझा गांव के निवासी राहुल ने जब अपने घर में लगी आग को किसी साजिश का नतीजा बताया तो पुलिस ने उसकी तहरीर पर कोई संज्ञान नहीं लिया। आहत युवक राहुल ने त्योरासी क्षेत्र में स्थित मोबाइल टावर पर चढ़कर घंटों तक हंगामा किया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अलर्ट मोड पर ला दिया।
युवक की मांग और शिकायत
राहुल का आरोप है कि उसके घर को जानबूझकर आग के हवाले कर दिया गया था। उन्होंने परसपुर थाने में लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की बजाय मामला टालमटोल करने की कोशिश की। निराश और आक्रोशित युवक ने अंततः टावर पर चढ़ने का फैसला लिया। टावर पर चढ़कर वह लगातार न्याय की पुकार करता रहा और मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग करता रहा।
पुलिस-प्रशासन की सक्रियता
घंटों चली इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। परसपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक कमल शंकर चतुर्वेदी और क्षेत्राधिकारी करनैलगंज अभिषेक दावाच्या ने युवक से बातचीत की। उन्होंने राहुल को मुकदमा दर्ज करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद युवक को सकुशल टावर से नीचे उतारा गया।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा न्याय न मिलने के कारण अब आम लोग ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे-छोटे मामलों में भी पुलिस रिश्वत और पक्षपात का सहारा लेती है, जिससे पीड़ितों को न्याय की राह लंबी हो जाती है।
बढ़ता जा रहा है टावर ट्रेंड
गोण्डा जिले में यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय में कई युवक न्याय न मिलने पर मोबाइल टावर पर चढ़ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ऐसे आत्मघाती कदम बढ़ रहे हैं। समाजसेवी संगठनों ने भी इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि राहुल की तहरीर पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। स्थानीय स्तर पर लोगों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और वे न्याय की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।
यह घटना एक बार फिर सिस्टम की कमियों को उजागर करती है, जहां आम आदमी को न्याय पाने के लिए सड़क पर उतरना या टावर चढ़ना पड़ रहा है। गोण्डा प्रशासन पर अब इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी है।












































