फर्रुखाबाद : बिजली विभाग की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। कमालगंज थाना क्षेत्र के ग्राम रैगाई में नीचे झूल रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन ने एक मासूम किशोर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में 15 वर्षीय युवक गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार ग्राम रैगाई निवासी अकमल पुत्र जाने आलम (15 वर्ष) खेत से ट्रैक्टर पर मक्का लादकर घर लौट रहा था। इसी दौरान गांव के रास्ते से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन, जो लंबे समय से जमीन की ओर झूल रही थी, अचानक उसके संपर्क में आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तार किशोर की आंख और नाक से टकरा गया, जिससे उसे जोरदार करंट लगा और वह गंभीर रूप से झुलस गया।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण तत्काल उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक देखते हुए कानपुर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि किशोर की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त हाईटेंशन लाइन काफी समय से नीचे झूल रही थी। इसकी जानकारी कई बार बिजली विभाग के कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारी जय अजीत कुमार तथा बाल लाइनमैन शैलेंद्र कुमार उर्फ लालू को भी इस समस्या की जानकारी थी, फिर भी लाइन को दुरुस्त नहीं कराया गया।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीणों के अनुसार इसी लाइन की चपेट में आकर पहले भी तीन से चार लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं, लेकिन विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते लाइन को सही कर दिया जाता तो आज एक मासूम किशोर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने को मजबूर नहीं होता।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद काफी देर तक बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई, जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहा। घटना के बाद गांव में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब बार-बार शिकायतें की गईं और पहले भी हादसे हो चुके थे, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी क्यों चुप बैठे रहे? क्या विभाग किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा था? ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही की वह कीमत है जिसे एक मासूम किशोर अपने जीवन से चुका रहा है। यदि प्रशासन और बिजली विभाग अब भी नहीं चेते, तो ऐसी झूलती हुई लाइनें किसी और परिवार की खुशियां भी छीन सकती हैं।












































