UP: वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने बीमा पॉलिसी के बहाने लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दिल्ली से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का एक सदस्य अभी भी फरार है। आरोपियों ने खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर एक व्यक्ति से मनी बैक और अतिरिक्त लाभ का झांसा देकर करीब 12.5 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने ठगी से जुड़े बैंक खाते को फ्रीज कर दिया है और मामले की जांच जारी है।
प्रीमियम अपडेट के बहाने जाल में फंसाया
पुलिस जांच के मुताबिक, पीड़ित की बीमा पॉलिसी में सिर्फ दो लाख रुपये का प्रीमियम शेष था। इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने फोन कर खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी बताया। उन्होंने पॉलिसी अपडेट कराने, बेहतर रिटर्न और मनी बैक का लालच देकर पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में 12.5 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ित ने वाराणसी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
फर्जी कॉल सेंटर से संचालित हो रहा था नेटवर्क
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली निवासी शिवकुमार गौतम, अमन कुमार, विष्णु कुमार, राहुल कुमार और आलोक सिंह को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को बीमा पॉलिसी अपडेट करने, प्रीमियम जमा कराने और अतिरिक्त लाभ दिलाने का झांसा देकर कॉल करते थे। शिवकुमार के नाम पर म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि अन्य आरोपी खातों के संचालन और रकम के लेन-देन की जिम्मेदारी संभालते थे।
नकदी और कार बरामद, फरार आरोपी की तलाश जारी
एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि पीड़ित की पॉलिसी रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस की थी। आरोपियों ने कंपनी के अधिकारी बनकर भरोसा जीता और कई बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम हासिल की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 65 हजार रुपये नकद और ठगी की रकम से खरीदी गई एक कार बरामद की है। फिलहाल गिरोह के फरार सदस्य सद्दाम की तलाश तेज कर दी गई है।
पूरे नेटवर्क की खंगाल रही पुलिस
साइबर क्राइम पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी इसी तरीके से अपना शिकार बना चुका हो सकता है। पुलिस बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि इस ठगी के नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

















































