दिल्ली में अमित शाह-योगी की अहम बैठक, इस मुद्दे पर हुई बड़ी चर्चा!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। करीब आधे घंटे से अधिक चली इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के आवंटन के साथ-साथ सरकार और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यूपी बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी इस बैठक में विचार-विमर्श हुआ।

कैबिनेट विस्तार के बाद संगठन में भी बदलाव की तैयारी

राज्य में हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार पूरा होने के बाद अब बीजेपी सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर रिक्त पदों को भरने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर जल्द नियुक्तियां की जा सकती हैं। इसके जरिए संगठन को और मजबूत करने तथा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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2027 विधानसभा चुनाव पर बीजेपी का फोकस

वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी अभी से अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देने में जुट गई है। पार्टी विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को गंभीरता से देख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया कैबिनेट विस्तार भी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है ताकि चुनावी मुकाबले में पार्टी मजबूत स्थिति में रहे।

सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश

योगी सरकार के मौजूदा मंत्रिमंडल में विभिन्न जातीय और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्षत्रिय समाज से हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी और बृजेश पाठक ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालिया विस्तार में भूपेंद्र चौधरी को शामिल कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जाट समुदाय को साधने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा ब्राह्मण, भूमिहार, ओबीसी, दलित और वैश्य समाज के कई नेताओं को कैबिनेट में स्थान देकर व्यापक सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

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संवैधानिक सीमा पूरी, अब सभी 60 मंत्री पद भरे

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्तर पर भी अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने अपने संतुलन के संदेश को मजबूत किया है। वैश्य, ओबीसी, दलित, क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदाय के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। कैबिनेट विस्तार से पहले योगी सरकार में 54 मंत्री थे और छह पद रिक्त थे, जिन्हें अब भर दिया गया है। इससे राज्य मंत्रिमंडल अपनी निर्धारित अधिकतम संख्या तक पहुंच गया है।

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