बांदा: बिजली विभाग की कथित लापरवाही से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में स्थायी लोक अदालत, बांदा ने महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आम लोगों को हुई क्षति और सेवाओं में अनावश्यक देरी के लिए विभाग जवाबदेह है। तीनों मामलों में पीड़ितों को राहत देने के साथ विभाग को निर्धारित समयसीमा में आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
छह साल तक नहीं मिला कृषि बिजली कनेक्शन
पहले मामले में कालिंजर क्षेत्र के किसान लल्लू ने वर्ष 2019 में कृषि विद्युत कनेक्शन के लिए ₹39,440 जमा किए थे, लेकिन लंबे समय तक उन्हें कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया। किसान का आरोप था कि सुविधा शुल्क न देने के कारण उनके आवेदन को जानबूझकर लंबित रखा गया। इस पर स्थायी लोक अदालत ने बिजली विभाग को 45 दिनों के भीतर कनेक्शन जारी करने, ₹7 हजार क्षतिपूर्ति देने तथा तय समय में आदेश का पालन न होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए।
करंट लगने से भैंस की मौत, विभाग पर तय हुई जिम्मेदारी
दूसरे मामले में तिंदवारी क्षेत्र निवासी फूलचन्द्र द्विवेदी की भैंस घर के सामने झूल रहे बिजली के तार की चपेट में आकर मर गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बिजली विभाग की लापरवाही को दुर्घटना का कारण माना। अदालत ने पीड़ित पशुपालक को ₹50 हजार का मुआवजा देने का आदेश पारित किया।
हाईटेंशन लाइन की चपेट में प्लंबर की मौत पर बड़ा फैसला
तीसरा मामला वर्ष 2022 का है, जब शहर के जरैली कोठी इलाके में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से प्लंबर अंसार मंसूरी की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि सुरक्षा मानकों का पालन न किए जाने के कारण यह हादसा हुआ। इसके आधार पर मृतक के परिजनों को ₹8.16 लाख की क्षतिपूर्ति देने के आदेश जारी किए गए।
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लोक अदालत का सख्त संदेश
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह और सदस्या शिवांगी शुक्ला की पीठ ने तीनों मामलों में अलग-अलग निर्णय सुनाए। अदालत के इन आदेशों को बिजली विभाग की जवाबदेही तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि सार्वजनिक सेवाओं में लापरवाही और नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी अब विभागों के लिए महंगी साबित हो सकती है।
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