रायबरेली: पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2018 में लगाए गए पॉलिथीन प्रतिबंध के आदेश जिले में पूरी तरह हवा साबित हो रहे हैं। सरकारी रोक के बावजूद शहर के प्रमुख बाजारों और मोहल्लों में प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग बेधड़क और धड़ल्ले से किया जा रहा है। दुकानों से लेकर सब्जी के ठेलों तक में खुलेआम पॉलिथीन बांटी जा रही है, जबकि जिम्मेदार नगर पालिका प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
अभियान के नाम पर केवल ‘कागजी खानापूर्ति’
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन पॉलिथीन पर लगाम लगाने के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है। प्रतिबंध लागू होने के शुरुआती दिनों में नगर पालिका ने जरूर सक्रियता दिखाते हुए जब्ती की कार्रवाई की थी। उस समय पॉलिथीन के प्रयोग में कुछ कमी भी दर्ज की गई थी, लेकिन जैसे ही प्रशासनिक स्तर पर सख्ती ढीली पड़ी, स्थिति फिर से जस की तस हो गई। अब आलम यह है कि समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
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नालियां चोक, खाली प्लॉटों में कचरे का ढेर
पॉलिथीन के अत्यधिक प्रयोग के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह कचरे की विकराल समस्या पैदा हो गई है। पॉलिथीन जमा होने से शहर के बड़े नाले और नालियां पूरी तरह अट (चोक) गए हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विभिन्न मोहल्लों में स्थित खाली प्लॉटों में पॉलिथीन और प्लास्टिक के कचरे के ढेर साफ देखे जा सकते हैं।
बेजुबानों की जान पर मंडराया खतरा
पॉलिथीन का यह कचरा आवारा मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। भोजन की तलाश में सड़कों व खाली प्लॉटों पर घूमने वाले मवेशी खाद्य सामग्री के साथ जहरीली पॉलिथीन को भी निगल रहे हैं। इससे पशुओं के पेट में पॉलिथीन जमा हो रही है, जिससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
सख्त कार्रवाई की दरकार
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब तक नगर पालिका प्रशासन द्वारा पॉलिथीन के थोक विक्रेताओं और प्रयोग करने वालों के खिलाफ निरंतर व प्रभावी चेकिंग अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है। औपचारिकता छोड़कर धरातल पर कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
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