UP: रायबरेली जिले में महंगाई की चौतरफा मार से आम जनता का घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। बीते 20 दिनों के भीतर चीनी के दामों में आई अप्रत्याशित और बेतहाशा उछाल ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। अचानक बढ़े इन दामों के पीछे थोक व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत की आशंका जताई जा रही है, जिससे फुटकर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है।
आसमान छू रहे चीनी के भाव, 20 दिन में ₹15 का उछाल
बाजार में चीनी की कीमतें हर दिन नया रिकॉर्ड बना रही हैं। महज 20 दिन पहले तक जो चीनी 45 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही थी, वह 15 दिन पूर्व बढ़कर 48 रुपये पहुंची। इसके बाद दो-चार दिनों में ही इसने 50 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और वर्तमान में तेजी से बढ़ते हुए 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। रविवार को थोक दुकानदारों को चीनी का भाव 57 रुपये प्रति किलो चुकाना पड़ा, जिसके चलते आम उपभोक्ताओं को फुटकर दुकानों से 60 रुपये प्रति किलो के ऊंचे दामों पर चीनी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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गोदामों में भरा माल, फिर भी बढ़ रहे दाम
स्थानीय फुटकर दुकानदारों का साफ तौर पर कहना है कि थोक विक्रेता जानबूझकर चीनी की जमाखोरी कर रहे हैं। जिले के गोदामों में लगभग 40 से 50 ट्रक चीनी का स्टॉक पहले से भरा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कृत्रिम किल्लत दिखाकर रोजाना थोक भाव बढ़ाए जा रहे हैं। गोदामों में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन थोक व्यापारी मुनाफाखोरी के चक्कर में रोज रेट बढ़ा रहे हैं। रोज बदलते दामों के कारण फुटकर ग्राहकों को जवाब देना भारी पड़ रहा है और बिक्री पर भी बुरा असर पड़ा है।
प्रशासनिक कार्रवाई की उठी मांग
चीनी के दामों में अचानक आई इस तेजी से मध्यवर्गीय और गरीब परिवारों का मासिक राशन का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। त्योहारों और लगन के सीजन से ठीक पहले रसोई के इस बजट बिगाड़ने वाले झटके से लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और छोटे व्यापारियों ने जिला प्रशासन व खाद्य आपूर्ति विभाग से मांग की है कि थोक विक्रेताओं के गोदामों पर तुरंत छापेमारी की जाए। मुनाफाखोरी और जमाखोरी करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर चीनी की दरों को नियंत्रित किया जाए।
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