मुगलसराय: 20 हजार मांगने के आरोप पर NIMA का हंगामा, CMO कार्यालय के बाहर धरना

मुगलसराय: आयुर्वेदिक चिकित्सक से कथित तौर पर जांच के नाम पर 20 हजार मांगने के आरोप को लेकर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (NIMA) के चिकित्सकों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। संगठन ने जांच अधिकारी डॉ. संजय यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने या उन्हें तत्काल हटाने की मांग की है। साथ ही CMO के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई गई है।

क्लिनिक पहुंचकर कार्रवाई की धमकी देने का आरोप

NIMA सेंट्रल काउंसिल के सचिव डॉ. शैलेश राय के मुताबिक, 13 अगस्त को डॉ. संजय यादव समेत कुछ लोग डॉ. नरेश पटेल के क्लिनिक पहुंचे थे। आरोप है कि टीम ने उनके आयुर्वेदिक पंजीकरण को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी और करीब एक घंटे तक उन्हें रोके रखा। इस दौरान ₹20 हजार देने का दबाव बनाने और कागज पर कुछ लिखने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया गया।

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अधिकार क्षेत्र से बाहर जांच करने का आरोप

डॉ. शैलेश राय ने कहा कि आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सकों के पंजीकरण की जांच का अधिकार क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी के पास होता है। उनका आरोप है कि डॉ. संजय यादव ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर चिकित्सक को मानसिक रूप से परेशान किया। NIMA ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा।

पंजीकृत डॉक्टरों को परेशान करने का आरोप

NIMA के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. ओपी सिंह ने आरोप लगाया कि पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सकों को लगातार परेशान किया जा रहा है, जबकि झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि संगठन इस मामले को लेकर पीछे नहीं हटेगा और न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा। संगठन ने जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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एसीएमओ ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, एसीएमओ गुलाब चंद्रा ने NIMA के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेश पटेल के क्लिनिक के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय में आईजीआरएस के जरिए शिकायत मिली थी, जिसके बाद CMO कार्यालय ने जांच समिति गठित की। जांच में चिकित्सक का आयुर्वेदिक पंजीकरण मिला, लेकिन टीम के अनुसार क्लिनिक में बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां, हाइड्रोसील समेत अन्य ऑपरेशन किए जाने के साक्ष्य और एक मेडिकल स्टोर भी पाया गया। एसीएमओ के मुताबिक, इन्हीं बिंदुओं के आधार पर चिकित्सक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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