फरह: श्रावण मास में मध्य प्रदेश और राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्धन सहित ब्रज क्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच आगरा-मथुरा हाईवे और गोवर्धन मार्ग पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में क्षमता से कई गुना अधिक श्रद्धालुओं को बैठाकर दौड़ाया जा रहा है, वहीं टेंपो और अन्य छोटे यात्री वाहनों में भी मानकों को ताक पर रखकर सवारियां भरी जा रही हैं।
हाईवे पर किसी भी समय ऐसे ओवरलोड वाहन आसानी से देखे जा सकते हैं। कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पांच दर्जन से अधिक लोगों को बैठाकर सफर कराया जा रहा है। वहीं टेंपो में भी दो दर्जन तक सवारियां ठूंसकर ले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन वाहनों में सफर करने वाले अधिकांश श्रद्धालु यातायात नियमों और ओवरलोडिंग से होने वाले खतरे से अनजान हैं।
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पिछले हादसों से भी नहीं लिया सबक
आगरा-मथुरा हाईवे पर पिछले वर्ष रैपुराजात के समीप मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इसके अलावा गोवर्धन रोड पर भी ओवरलोड और अनियंत्रित वाहनों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। इन घटनाओं के बावजूद यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
श्रावण मास में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही सड़कों पर ऐसे वाहनों का दबाव भी बढ़ गया है। बावजूद इसके ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और टेंपो के खिलाफ प्रभावी अभियान नजर नहीं आ रहा। इससे सवाल उठ रहा है कि हादसे का इंतजार करने के बाद ही यातायात विभाग की कार्रवाई शुरू होगी?
चार पहिया वाहनों पर सख्ती, ओवरलोडिंग पर नरमी क्यों?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यातायात कर्मचारी अक्सर चार पहिया वाहनों को देखकर तुरंत रोककर कागजात और अन्य नियमों की जांच शुरू कर देते हैं, लेकिन यात्रियों से खचाखच भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और टेंपो पर उतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती। यदि यातायात नियम सभी के लिए समान हैं तो फिर ओवरलोड यात्री वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही,
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