जौनपुर: एआरटीओ कार्यालय में पांच डंपरों के पंजीयन को लेकर सामने आए कथित घूसखोरी के मामले में परिवहन विभाग की जांच के बाद कार्रवाई की गई है। वाहन मालिक की शिकायत की जांच करने पहुंचे उच्चाधिकारियों ने प्रकरण की पड़ताल की, जिसमें कार्यालय में तैनात लिपिक गणेश दत्त मिश्रा को दोषी पाया गया। इसके बाद विभाग ने उनका पटल बदल दिया। वहीं, मामले की विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट लखनऊ स्थित परिवहन विभाग के मुख्यालय भेज दी गई है।
मड़ियाहूं निवासी वाहन मालिक विनय सिंह अपने पांच डंपरों के पंजीयन के लिए एआरटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। उनका आरोप था कि पंजीयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए लिपिक गणेश दत्त मिश्रा ने कथित तौर पर घूस की मांग की। रकम देने से इनकार करने पर पांचों डंपरों का पंजीयन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
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लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद शुक्रवार को वाहन मालिक अपने पांचों डंपरों को लेकर एआरटीओ कार्यालय पहुंच गए। एक साथ पांच भारी वाहनों के खड़े होने से सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
वीडियो वायरल होने और कथित घूसखोरी के आरोपों की जानकारी शासन तक पहुंचने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए। शासन के निर्देश पर उप परिवहन आयुक्त और आरटीओ वाराणसी एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से बातचीत कर आरोपों की जानकारी ली और संबंधित दस्तावेजों व प्रकरण से जुड़े तथ्यों की जांच की। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों में सत्यता पाए जाने के बाद आरोपी लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की गई। विभाग ने उनका पटल बदल दिया और प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी।
उधर, आरोपी लिपिक गणेश दत्त मिश्रा ने भी मामले में अपना पक्ष रखते हुए एआरटीओ को पत्र भेजा है। उन्होंने वायरल वीडियो और समाचारों में संघ के पदाधिकारी का नाम लेकर कथित तौर पर छवि धूमिल किए जाने का आरोप लगाया है।
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