लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण मोर्चा का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को मोर्चा के कार्यकर्ता 1090 चौराहे पर पहुंचे और यूजीसी कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कानून को वापस लेने की मांग उठाते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की।
कानून से भविष्य प्रभावित होने का आरोप
सवर्ण मोर्चा का आरोप है कि प्रस्तावित यूजीसी कानून से सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मोर्चा ने आशंका जताई कि कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग कर समाज के लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया जा सकता है और उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।
कानून की अर्थी निकालकर जताया विरोध
अपनी मांग को और मुखर करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कानून को वापस लेने की मांग की। मोर्चा नेताओं का कहना है कि उनकी आपत्तियों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सवर्ण मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मोर्चा का दावा है कि सवर्ण समाज की नाराजगी को नजरअंदाज करना सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है और आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
सवर्ण समाज की नाराजगी बनेगी चुनावी चुनौती?
यूजीसी कानून को लेकर अलग-अलग स्थानों पर सवर्ण समाज की ओर से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नाराजगी आने वाले समय में विपक्ष के लिए राजनीतिक मजबूती का आधार बनेगी या सत्ता पक्ष के लिए चुनौती खड़ी करेगी। फिलहाल लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन ने यूजीसी कानून को लेकर जारी राजनीतिक और सामाजिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

















































