रायबरेली: शहीद स्मारक के पास सई नदी में बड़े पैमाने पर फैली जलकुंभी अब स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। जलकुंभी की मोटी परत के चलते नदी का पानी सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके कारण नदी का पानी आसपास के खेतों में फैलने लगा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
15 बीघे धान की फसल पानी में डूबी
नदी का पानी खेतों में पहुंचने से करीब 15 बीघे में तैयार खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में काफी मेहनत और पैसा लगाया था, लेकिन कटाई से पहले ही पानी भर जाने के कारण पूरी फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है। इससे प्रभावित किसान आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
12 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
सई नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही आसपास के करीब 12 गांवों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते प्रशासन की ओर से जलकुंभी हटाने या जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। संभावित खतरे को देखते हुए लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और ग्रामीणों ने तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों ने खुद संभाली नदी की सफाई
प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय अब ग्रामीणों ने खुद नदी की सफाई का मोर्चा संभाल लिया है। शहीद स्मारक के पास आसपास के गांवों से जुटे किसानों और युवाओं ने मिलकर सफाई अभियान शुरू किया। लोग नावों के सहारे नदी में उतरकर हंसिया और अन्य साधनों से जलकुंभी काट रहे हैं और उसे नदी के किनारे पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलकुंभी जल्द नहीं हटाई गई तो पानी का दबाव बढ़ने से बांध को नुकसान पहुंच सकता है।
जेसीबी-पोकलैंड और मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सई नदी में तत्काल जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर बड़े स्तर पर जलकुंभी हटाने की मांग की है, ताकि पानी की निकासी बहाल हो सके। इसके साथ ही प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है। किसानों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत पानी में डूब गई है, ऐसे में प्रशासन को जल्द राहत पहुंचानी चाहिए।
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