बाराबंकी: लोधेश्वर महादेव धाम के आवागमन को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को उस समय हलचल बढ़ गई, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी नवरत्न कुमार रामनगर पहुंचे। टीम ने लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग का मौके पर निरीक्षण करने के साथ केसरीपुर मोड़ की भी जांच-पड़ताल की। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों की समस्या और प्रस्तावित बाईपास से जुड़ी परिस्थितियों को मौके पर परखा।
मामला जनहित याचिका संख्या 434/2026 जगदीश एवं अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर यह आकलन करने का निर्देश दिया है कि स्थानीय लोगों की समस्या के समाधान के लिए एलिवेटेड रोड अथवा कॉरिडोर बनाना आवश्यक और व्यवहारिक है या नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एलिवेटेड रोड संभव नहीं है तो समस्या के समाधान के लिए कोई अन्य उचित वैकल्पिक व्यवस्था तलाश की जाए।
निरीक्षण के दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगदीश धीमान ने NHAI अधिकारी नवरत्न कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लोधेश्वर महादेव मंदिर की धार्मिक महत्ता और श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही का हवाला देते हुए वर्तमान हाईवे अलाइनमेंट को यथावत रखने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि बुढ़वल मोड़ से महादेवा मोड़ तक करीब 45 मीटर का कॉरिडोर उपलब्ध है। ऐसे में एलिवेटेड रोड, सर्विस रोड और व्हीकल अंडरपास जैसी व्यवस्थाएं वर्तमान मार्ग पर ही विकसित की जा सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रस्तावित बाईपास को अनावश्यक बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की। साथ ही जनवरी-फरवरी 2024 में प्रस्तावित बाईपास अलाइनमेंट पर हुई जमीन की खरीद-फरोख्त की जांच कराने की मांग भी रखी गई।कोर्ट ने निरीक्षण और जांच के परिणाम को हलफनामे के माध्यम से अपने समक्ष रखने का निर्देश दिया है। फिलहाल हाईकोर्ट ने एलिवेटेड रोड बनाने का सीधा आदेश नहीं दिया है, बल्कि NHAI को मौके की वास्तविक स्थिति देखकर व्यवहारिक समाधान तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी है।



















































