रायबरेली: जिले में चोरी, लूट, डकैती और हत्या जैसी गंभीर वारदातों का खुलासा करने के लिए अब रायबरेली पुलिस पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गई है। कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पुलिस महकमे को पहली बार अपना आधिकारिक डॉग स्क्वायड मिला है।
दूसरे जिलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति
अब तक रायबरेली पुलिस को जब भी डॉग स्क्वायड की आवश्यकता होती थी, तो उन्हें इसके लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। पहली बार रायबरेली पुलिस को अपना खुद का डॉग स्क्वायड मिला है, जिससे आपराधिक मामलों के खुलासे में अब काफी तेजी आएगी और कीमती समय की भी बचत होगी।
बीएसएफ एकेडमी से ली है नौ महीने की विशेष ट्रेनिंग
पुलिस बेड़े में शामिल यह विशेष श्वान महज 14 महीने का एक युवा और ऊर्जावान जर्मन शेफर्ड है, जिसका नाम ‘निशा’ है। निशा को मध्य प्रदेश के टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) एकेडमी में नौ महीने की कड़ी और उच्च स्तरीय ट्रेनिंग दी गई है। डॉग स्क्वायड इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि यह निशा का पहला पोस्टिंग स्टेशन है।
इंसान से तीन सौ गुना ज्यादा है सूंघने की क्षमता
डॉग स्क्वायड इंचार्ज सुनील कुमार के अनुसार, जर्मन शेफर्ड निशा की सूंघने की क्षमता सामान्य मनुष्य से करीब तीन सौ गुना अधिक है। इसकी यही अद्भुत खूबी इसे घटनास्थल से पांच किलोमीटर के दायरे तक जाकर आरोपियों और सुरागों का पता लगाने में पूरी तरह सक्षम बनाती है। इसकी असाधारण कार्यक्षमता को देखते हुए इस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
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पुलिस अधीक्षक ने जताई उम्मीद, मामलों के खुलासे में होगी आसानी
पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने इस उपलब्धि पर बात करते हुए कहा कि रायबरेली पुलिस को निशा के रूप में एक मजबूत और काबिल साथी मिला है। कुछ मामलों में डॉग स्क्वायड बेहद अहम साबित होता है और पूरी उम्मीद है कि निशा की मदद से पुलिस को आपराधिक वारदातों के खुलासे में बड़ी सफलता मिलेगी।

















































