‘अखिलेश बाबू आप एकदम्मे चुप्पी साधे हैं…’,अमेठी विवाद पर ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला

UP: उत्तर प्रदेश के अमेठी में समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। सपा विधायक महाराजी देवी के आवास पर कथित हंगामे और मारपीट के आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मामले को लेकर अब योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।

राजभर का हमला- गैर यादव पिछड़ों और दलितों का अपमान

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी में गैर यादव पिछड़ों और दलितों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में सम्मान और सत्ता पर सिर्फ एक वर्ग का कब्जा है। राजभर ने कहा कि प्रजापति समाज से आने वाली महिला विधायक के साथ उनकी ही पार्टी के लोग अभद्रता और मारपीट कर रहे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है।

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‘यादव मोह में अंधे हो गए अखिलेश’

राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि विधायक के बेटे ने कैमरे पर कुछ नेताओं के नाम लेकर आरोप लगाए हैं, इसके बावजूद सपा प्रमुख कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे धृतराष्ट्र पुत्र मोह में अंधे थे, वैसे ही अखिलेश यादव ‘यादव मोह’ में आंखें बंद किए बैठे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सपा की PDA राजनीति को भी चुनावी नारा करार देते हुए सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?

मंगलवार रात अमेठी की आवास विकास कॉलोनी स्थित सपा विधायक महाराजी देवी के घर के बाहर कथित तौर पर जमकर हंगामा हुआ। विधायक परिवार का आरोप है कि कई वाहनों से पहुंचे दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने गाली-गलौज की, धमकियां दीं और विरोध करने पर मारपीट भी की। परिवार का यह भी कहना है कि घटना का वीडियो बनाए जाने पर मोबाइल फोन छीन लिया गया। विधायक के बेटे अनुराग प्रजापति ने पुलिस को तहरीर देकर जय सिंह प्रताप यादव, शेर बहादुर यादव और बलराम यादव समेत कई लोगों को नामजद किया है।

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पुलिस जांच जारी

घटना के पीछे शुरुआती वजह सोशल मीडिया विवाद बताई जा रही है, हालांकि स्थानीय स्तर पर इसे सपा के भीतर लंबे समय से चल रही राजनीतिक नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि महाराजी देवी को टिकट मिलने के बाद कुछ स्थानीय नेताओं में असंतोष था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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