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समाजवादी पार्टी से जुड़े मिले विकास दुबे के तार, पत्नी ने लड़ा था पार्टी के समर्थन पर चुनाव

कानपुर के बिठूर (Kanpur, Bithoor) थाना क्षेत्र में बदमाशों को पकड़ने गई पुलिस पर किए गए हमले में सीओ और एसओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए. वहीं अब इस मामले को लेकर सियारी आरोपों का दौर शुरू हो चुका है. सपा, बसपा और कांग्रेस योगी सरकार में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. वहीं इसी बीच इस मामले एक नया मोड़ आता दिख रहा है. दरअसल, अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) की पत्नी का एक पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह वह समाजवादी पार्टी के समर्थन में चुनाव लड़ती दिखाई दे रहीं हैं. इस पोस्टर ने आरोप झेल रही बीजेपी को हमला करने का मौका दे दिया.


जानकारी के मुताबिक विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे (Richa Dubey) का पोस्टर उस वक्त का है, जब रिचा दुबे घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही थीं. जिला पंचायत सदस्य पद की दावेदार रिचा दुबे को उस वक्त समाजवादी पार्टी का समर्थन प्राप्त था. उसके पोस्टर में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की तस्वीरें भी साफ दिखाई दे रही हैं. बता दें कि विकास दुबे बसपा के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुका है.


बसपा की शह पर बनाई आपराधिक जमीन

बता दें कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की सपा और बसपा सरकारों में अच्छी पकड़ रही है. 2002 में बीएसपी की मायावती सरकार के दौरान उसकी तूती बोलती थी. उसके ऊपर जमीनों की अवैध खरीद फरोख्त का आरोप है. उसने गैर कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्तियां बनाई हैं. बिठूर में ही उसके स्कूल और कॉलेज हैं. वह एक लॉ कॉलेज का भी मालिक है. विकास दुबे अकबरपुर सीट से चुनाव लड़ने वाले बसपा सांसद रामराम पाल सांसद औऱ मायावती सरकार में मंत्री रहे अनंत मिश्रा का बेहद करीबी बताया जा रहा है. इन्हीं के संरक्षण से विकास दुबे ने आपराधिक दुनिया में नाम कमाया.


अपराध से बनाई सत्ता में गहरी पैठ

विकास दुबे ने अपने अपराधों के दम पर पंचायत और निकाय चुनावों में कई नेताओं के लिए काम किया और उसके संबंध प्रदेश की सभी प्रमुख पार्टियों से हो गए. 2003 में शिवली थाने के अंदर घुस कर इंस्पेक्टर रूम में बैठे तत्कालीन श्रम संविदा बोर्ड के चैयरमेन, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता संतोष शुक्ल को गोलियों से भून दिया था. उसका इतना खौफ था कि, कोई गवाह सामने नहीं आया. जिसके कारण वह केस से बरी हो गया. इसकी एक शादी शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क के पास रहने वाले राजू खुल्लर की बहन से हुई थी. ब्राह्मण शिरोमणि पंडित विकास दुबे के नाम से फेसबुक पेज बना रखा था.


चचेरे भाई की हत्या समेत कई में आया नाम

विकास दुबे इसके अलावा 2000 में कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या के मामले में भी विकास दुबे को नामजद किया गया था. इसी साल उसके ऊपर रामबाबू यादव की हत्या के मामले में साजिश रचने का आरोप लगा था. यह साजिश उसने जेल से बैठकर रची थी. 2004 में एक केबल व्यवसाई दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी विकास का नाम आया था. 2013 में भी विकास दुबे ने हत्या की एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया था.


जेल से जीता था चुनाव

विकास दुबे जेल में रहने के दौरान ही चुनाव लड़ा था और शिवराजपुर से नगर पंचयात का चुनाव जीता भी था. बताया जा रहा है कि बीएसपी के कार्यकाल में उसकी बीएसपी में कड़ी पैठ थी. जेल से ही वह हत्याएं समेत कई वारदातों को अंजाम दिलवा देता था.


Also Read: कानपुर शूटआउट: तो क्या 1861 का बना पुलिस एक्ट आज पुलिसकर्मियों की हत्या का कारण बन रहा है ?


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