UP: लखनऊ में विजिलेंस टीम ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले के कथित सरगना और पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव को वेव मॉल से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई। इसके बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया। मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा में एनआरएचएम से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है।
2021 में शुरू हुई विजिलेंस जांच
देवीपाटन मंडल के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायत मिलने के बाद वर्ष 2021 में शासन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं के प्रमाण मिलने पर एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की गई। शासन से अनुमति मिलने के बाद बलरामपुर में मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
विजिलेंस की एफआईआर में मुकेश श्रीवास्तव के अलावा तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. सत्यदेव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीन कुमार, वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव, अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्य, कनिष्ठ सहायक पूनम सिंह और आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से कई अनुरक्षण कार्यों में बिना काम कराए या अधूरे कार्य के बावजूद पूरा भुगतान कर लिया गया।
वाहन, टेंडर और भुगतान में मिलीं अनियमितताएं
जांच में सामने आया कि आरवीएसके और सपोर्टिंग सुपरविजन योजना के तहत एक वाहन के स्थान पर तीन वाहनों का खर्च दर्शाकर धनराशि निकाली गई। इसके अलावा कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बिना निविदा के छपाई कार्य कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान किए गए, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
विजिलेंस जांच में चिकित्सा प्रतिपूर्ति वाउचरों के भुगतान के बदले 10 से 25 प्रतिशत तक रिश्वत लेने के आरोप भी सामने आए हैं। वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच बलरामपुर के अस्पतालों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं। मामले के कई आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ जांच जारी है। करीब 10 दिन पहले दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित घोटाले को लेकर भी मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले सीबीआई भी एनआरएचएम घोटाले के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जहां से वह जमानत पर रिहा हुए थे।
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