आरक्षण की मांग को लेकर ‘निषाद पार्टी’ के कार्यकर्ताओं ने बहाया UP पुलिस का खून, सीएम बांट रहे मुआवजा

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में आरक्षण की मांग को लेकर रास्त जाम कर रहे निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को हटाने गए करीमुद्दीनपुर थाने में तैनात 48 वर्षीय हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स को शनिवार की शाम पीट-पीटकर मार डाला गया। आरोपी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। उधर, सीएम योगी ने गहरा दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को 40 लाख की आर्थिक मदद की घोषणा कर दी है।

 

चिल्ला रही थी भीड़ – मारो, मारो

सोशल मीडिया पर बवाल के वक्त का जो वीडियो शेयर किया गया है, उसमें पथराव और लाठी-डंडों से पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाली भीड़ मारो, मारो चिल्ला रही है। सूत्रों का कहना है कि आरक्षण की मांग को लेकर निषाद पार्टी के लोग सरजू पांडेय पार्क में शनिवार को धरना-प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने पीएम मोदी के कार्यक्रम के चलते अनुमति नहीं दी थी। अशांति फैलाने की आशंका पर पुलिस ने निषाद पार्टी के एक नेता को हिरासत में भी लिया था।

 

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सूत्रों ने बताया कि उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय निषाद गाजीपुर से गुजरकर गोरखुपर की ओर जा रहे थे, और उनके स्वागत के लिए समाज के काफी लोग कठवामोड़ पुल के पास मौजूद थे। इस दौरान निषाद समाज के लोग अपने नेता के स्वागत के लिए मेन रोड पर आ गये थे। इसी दौरान पीएम की सभा से काफी गाड़ियां मुहम्मदाबाद की ओर जा रही थी।

 

समाज के लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया सुनकर उग्र हुई भीड़

जाम खुलवाने के लिए ड्यूटी से थाने लौट रहे करीमुद्दीनपुर थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया। वे पुलिसकर्मियों संग जाम स्थल पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को समझाने लगे। लेकिन निषाद पार्टी के नेता को पकड़ने की खबर मिलते ही निषाद समाज के लोगों की भीड़ उग्र हो गई और चक्काजाम कर दिया। पुलिस को देखते ही भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया।

 

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सूत्रों का कहना है कि इस दौरान भीड़ की पत्थरबाजी में करीमुद्दीनपुर थाने में तैनात हेड कान्स्टेबल सुरेन्द्र वत्स घायल हो गए थे, जिनका भीड़ ने पीट-पीट कर बुरा हाल कर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल ले जाते वक्त उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से लौट रहे भाजपा नेताओं के वाहनों पर शुरू में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ईंट-पत्थर फेंका। इससे दोनों पक्षों में कई बार जमकर तकरार भी हुई।

 

संजय निषाद बोले- इस तरह की स्थिति पैदा करने का काम यूपी सरकार कर रही

वहीं, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने भाजपा के लोगों पर इस घटना का आरोप मढ़ दिया है। उन्होंने कहा है कि इस घटना में उनके कार्यकर्ताओं का नहीं, बल्कि बीजेपी के लोगों का हाथ है। संजय निषाद भी इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। संजय निषाद ने दावा किया है कि उनकी पार्टी अहिंसात्मक आंदोलन में विश्वास करती है।

 

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संजय निषाद का कहना है कि उनके कार्यकर्ता ऐसी किसी भी घटना को अंजाम नहीं दे सकते। निषाद का आरोप है कि इस तरह की स्थिति पैदा करने का काम उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि निषादों को आरक्षण देने की बात तो यूपी सरकार करती है, लेकिन उनको उनका हक देती नहीं है, जिस वजह से निषाद समाज के लोग आज सड़कों पर उतरे हुए हैं।

 

मृतक सिपाही सुरेश वत्स के बेटे वीपी सिंह ने कहा कि पुलिस अब अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रही है। हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं? अब हम मुआवजे के साथ क्या करेंगे? इससे पहले बुलंदशहर और प्रतापगढ़ में इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।

 

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सीएम योगी ने किया पीड़ित परिवार को मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गाजीपुर जिले में भीड़ की ओर से किए गए पथराव में पुलिस कांस्टेबल सुरेश वत्स की मौत पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने परिवार को 50 लाख रुपये आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। शोक संतप्त परिवारीजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत पुलिस कांस्टेबल सुरेश वत्स की पत्नी को 40 लाख तथा उनके माता-पिता को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

 

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उन्होंने दिवंगत पुलिसकर्मी की पत्नी को असाधारण पेंशन तथा परिवार के एक सदस्य को मृतक आश्रित के तौर पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की है। इसके साथ ही उन्होंने गाजीपुर के डीएम व एसपी को निर्देशित किया है कि घटना के दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

इस घटना के बाद गाजीपुर के सीओ सिटी एमपी पाठक ने बताया कि मामले में 32 लोगों को नामजद किया गया है जबकि 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखी गई है। मामले की तफ्तीश जारी है।

 

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