उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यूपी एटीएस की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क को चलाने के लिए सीमा पार से आर्थिक मदद भेजी जा रही थी।
क्यूआर कोड के जरिए मंगाई जा रही थी फंडिंग
एटीएस के अनुसार, आरोपियों ने फंडिंग के लिए बेहद चालाक तरीका अपनाया था। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर करीब आठ बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिनमें क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे मंगवाए जाते थे। अब तक की जांच में लगभग दो लाख रुपये के लेन-देन की पुष्टि हुई है। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन सभी खातों को फ्रीज कर दिया है।
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आलमनगर से हुई थी गिरफ्तारी
इस पूरे मामले की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई, जब एटीएस ने आलमनगर रेलवे स्टेशन के पास से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इनमें मेरठ के साकिब और अरबाब के साथ-साथ गौतमबुद्धनगर के लोकेश और विकास शामिल हैं। शुरुआती पूछताछ में यह सामने आया कि ये लोग लखनऊ सहित कई बड़े शहरों में दहशत फैलाने की योजना बना रहे थे।
रेलवे और गैस ट्रक थे निशाने पर
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे रेलवे सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर बड़े हादसे की साजिश रच रहे थे। इसके अलावा, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने की भी योजना थी। उन्हें पाकिस्तान से निर्देश मिल रहे थे और छोटी घटनाओं को अंजाम देने के बदले पैसे का लालच दिया जा रहा था। भले ही रकम कम दिख रही हो, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि यह किसी बड़े हमले की तैयारी का हिस्सा था।
पंजाब कनेक्शन की भी जांच जारी
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों की योजना पंजाब भागने की थी, जहां उनके अन्य साथी छिपे हो सकते हैं। अब एटीएस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और पंजाब में भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और मामले की गहराई से जांच जारी है।










































