जौनपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में पुलिस को जनता की सुरक्षा और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जौनपुर के शाहगंज से सामने आए एक प्रार्थना पत्र ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैतृक संपत्ति के विवाद में एक दंपति ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का दावा है कि थाने और अधिकारियों से शिकायत के बावजूद जब सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें जिलाधिकारी की चौखट से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक अपनी फरियाद पहुंचानी पड़ी। अब दंपति ने सीएम योगी से न्याय की गुहार लगाई है।
मामला शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के नई आबादी का है, जहां रहने वाले आफताब असलम शेख का अपने पट्टीदारों से पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, संपत्ति को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसी विवाद को लेकर आए दिन दोनों पक्ष आमने-सामने भी हो जाते हैं। आरोप है कि इसी विवाद के बाद पुलिस उनके घर पहुंची।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दौरान छत पर रखे सामान को नुकसान पहुंचाया गया और सामान इधर-उधर फेंका गया। पीड़ित का आरोप है कि बिना किसी न्यायालयी फैसले का इंतजार किए पुलिस की मौजूदगी में उन्हें जबरन हटाया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, पीड़ित दंपति ने शाहगंज थाने में तैनात एक दरोगा पर उनकी पत्नी सबा शेख के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और मुकदमा दर्ज करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले की जानकारी कई बार शाहगंज कोतवाली पुलिस और जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई, लेकिन उनके अनुसार प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों की मनमाफिक रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी जाती है।
अब दंपति ने जिलाधिकारी के साथ-साथ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामला जिलाधिकारी के दरबार से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंच चुका है। शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा।
















































