रायबरेली: पहाड़ी और ऊपरी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी क्षेत्रों में साफ दिखने लगा है। जिले के सरेनी और डलमऊ क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है। गंगा का पानी घाटों से लेकर अंतिम संस्कार स्थलों तक पहुंच चुका है। पानी के उफान को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
डूबीं पंडा-पुजारियों की चौकियां, दुकानें खाली
सरेनी का प्रसिद्ध गेगासो और डलमऊ का मुख्य गंगा घाट जलमग्न होने की कगार पर पहुंच गए हैं। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घाटों पर पंडा-पुजारियों के बैठने की चौकियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। गेगासो स्थित प्रसिद्ध मां संकटा धाम के आसपास भी पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। घाट किनारे बनी दुकानों में पानी घुसने के कारण दुकानदार अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
अंतिम संस्कार में आ रही मुश्किलें
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। गेगासो और डलमऊ के घाटों पर अंतिम संस्कार स्थल जलमग्न हो चुके हैं, जिससे परिजनों का दाह-संस्कार करने आए लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दो दर्जन गांवों के मुहाने तक पहुंचा पानी
सरेनी और डलमऊ ब्लॉक के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ की संभावित चपेट में हैं। यद्यपि पानी अभी गांवों के अंदर दाखिल नहीं हुआ है, लेकिन गांवों के मुहाने तक बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है।
बाढ़ राहत चौकियां सक्रिय, निगरानी तेज
संभावित खतरे को देखते हुए राजस्व विभाग और प्रशासनिक टीमें लगातार तटवर्ती इलाकों व घाटों का निरीक्षण कर रही हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ राहत चौकियां स्थापित कर दी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और गंगा के जलस्तर की पल-पल निगरानी की जा रही है।



















































