सुल्तानपुर: यूजीसी की प्रस्तावित नई नियामक व्यवस्था, उच्च शिक्षा और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर शुक्रवार को परशुराम युवा वाहिनी और करणी सेना के संयुक्त बैनर तले कार्यकर्ताओं ने बरौसा चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर, पोस्टर और पंपलेट लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद जुलूस तहसील परिसर पहुंचा, जहां राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम जयसिंहपुर संदीप कुमार यादव को सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को लेकर आपत्तियां जताईं। उन्होंने कहा कि विधेयक में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के स्थान पर नई नियामक व्यवस्था बनाने का प्रावधान है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विधेयक को दिसंबर 2025 में संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है। इस पर व्यापक चर्चा के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जानी चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अमित कुमार तिवारी ने कहा कि उच्च शिक्षा की नियामक व्यवस्था में बड़े बदलाव से पहले इसके प्रभाव, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और विभिन्न सामाजिक वर्गों के हितों पर व्यापक चर्चा जरूरी है। प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रांत मिश्रा ने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने एससी/एसटी आरक्षण व्यवस्था से संबंधित प्रावधानों में संशोधन की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि आरक्षण के प्रावधानों और क्रियान्वयन की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए तथा किसी भी बदलाव से पहले संबंधित पक्षों से व्यापक विमर्श किया जाए।
करणी सेना जिलाध्यक्ष मनोज सिंह ने कहा कि शिक्षा और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को सरकार के समक्ष रखा गया है। इस दौरान अतुल मिश्रा, अभिषेक सिंह, सूरज सिंह, आशुतोष सिंह, अनिरुद्ध दूबे, अरविन्द राय, संतोष, घनश्याम तिवारी, सूरज, शनि, अरुण उपाध्याय और सुशील सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।


















































