UP: रायबरेली नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। भाजपा के कुछ नामित सभासदों ने पालिका में कराए जा रहे विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सचान को ज्ञापन सौंपा है। सभासदों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विकास कार्यों में पारदर्शिता पर जताई चिंता
जिले के दौरे पर पहुंचे प्रभारी मंत्री राकेश सचान से नामित सभासद अजय सिंह ने अन्य सभासदों की ओर से शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका के विभिन्न विभागों में कराए जा रहे कार्यों में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है और वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सभासदों का कहना है कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की जांच जरूरी है।
टेंडर और गुणवत्ता को लेकर लगाए आरोप
नामित सभासद अजय सिंह, अखिलेश तिवारी, शिशिर श्रीवास्तव और राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि निर्माण, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और जलकल विभाग से जुड़े कार्यों के आवंटन में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। उनके मुताबिक कई परियोजनाओं की गुणवत्ता और मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पहले भी विवादों में रही है नगर पालिका
नगर पालिका अध्यक्ष शत्रुघ्न सोनकर के कार्यकाल के दौरान इससे पहले भी कई मामलों में शिकायतें सामने आती रही हैं। बजट खर्च, कर्मचारियों के वेतन भुगतान और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर भी कुछ नागरिकों ने कथित रूप से विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायतें की हैं।
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कार्रवाई पर टिकीं लोगों की निगाहें
नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी जांच की मांग उठती रही है, लेकिन इस बार मामला सीधे प्रभारी मंत्री तक पहुंचने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में शिकायतों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी और अब सभी की निगाहें शासन एवं प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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