UP: रायबरेली के ऊंचाहार तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक अर्जीनवीश ने न्याय न मिलने से परेशान होकर आत्मदाह की चेतावनी दे दी। पीड़ित ने अपनी लिखित सूचना एसडीएम के पेशकार को सौंपने के बाद उसकी प्रति एसडीएम कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कर दी। नोटिस सामने आते ही तहसील कर्मियों और अधिकारियों में हलचल मच गई।
चार दशक पुराने पट्टे की जमीन को लेकर विवाद
धमधमा गांव निवासी 55 वर्षीय सुरेश कुमार निर्मल पिछले लगभग 30 वर्षों से ऊंचाहार तहसील में अर्जीनवीश के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि करीब 40 वर्ष पहले उन्हें सीलिंग के तहत साढ़े तीन बीघा जमीन का पट्टा मिला था। इस भूमि को संक्रमणीय श्रेणी में दर्ज कराने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई। कुछ महीने पहले एसडीएम ने मामले में लेखपाल से रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
कार्रवाई में देरी से नाराज होकर दी चेतावनी
पीड़ित का आरोप है कि लगातार तीन महीने तक तहसील के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि संबंधित फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो गए। इसी के चलते उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला तो वह तहसील परिसर में आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
लेखपाल ने आरोपों को बताया निराधार
मामले में नाम सामने आने के बाद संबंधित लेखपाल शंकरलाल ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी तैनाती यहां लगभग 15 दिन पहले हुई है और मामले की जांच जारी है। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित अनावश्यक दबाव बनाने के लिए आत्मदाह की चेतावनी दे रहे हैं। साथ ही कहा कि नोटिस का जवाब तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
एसडीएम बोले- मामला संज्ञान में नहीं आया
वहीं, जब इस संबंध में एसडीएम विवेक राजपूत से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। हालांकि तहसील परिसर में आत्मदाह की चेतावनी वाला नोटिस लगाए जाने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन पीड़ित की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और स्थिति को कैसे संभालता है।



















































