फतेहपुर: प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत विद्यालयों में मिड-डे मील के ऑडिट को लेकर असोथर ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) में कथित रिश्वतखोरी का वीडियो वायरल होने से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर रुपये गिनने, रजिस्टर में रकम दर्ज करने और ऑडिट के नाम पर विद्यालयों से धन लिए जाने की बातचीत सामने आ रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया गया कि 18 से 20 अगस्त तक विद्यालयों में मिड-डे मील का ऑडिट कराया गया। आरोप है कि असोथर ब्लॉक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से ऑडिट के नाम पर ₹500-₹500 लिए गए। सवाल यह है कि जब ऑडिट के लिए बाकायदा अभिलेखों की जांच होनी चाहिए तो क्या बिना दस्तावेज देखे ही रिपोर्ट ‘ओके’ कर दी गई?
रजिस्टर खुला और चलने लगी रुपयों की गिनती
वायरल वीडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति रजिस्टर खोलता नजर आ रहा है, जबकि दूसरे रजिस्टर में रकम की एंट्री किए जाने का दावा किया जा रहा है। कमरे में मौजूद कुछ लोग रुपयों की गिनती करते हुए भी सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह तक कहा गया कि रकम में “डिप्टी से लेकर बीएसए तक” हिस्सेदारी है और ऊपर तक हिसाब देना पड़ता है। अगर वीडियो में सामने आए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। इससे न केवल ऑडिट व्यवस्था बल्कि शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े होंगे।
145 विद्यालयों से 72,500 वसूली का दावा
असोथर ब्लॉक में करीब 157 विद्यालय बताए जा रहे हैं। वायरल बातचीत में कुछ विद्यालयों का ऑडिट बिना रकम लिए कराने की बात कही गई है। इसी आधार पर करीब 145 विद्यालयों से ₹500-₹500 लिए जाने का दावा सामने आया है।
145 विद्यालय × ₹500 = ₹72,50
हालांकि यह रकम केवल वायरल वीडियो में किए गए दावे के आधार पर निकाली गई है। वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी। यदि वसूली की पुष्टि होती है तो एक ब्लॉक में ही हजारों रुपये की कथित अनियमितता सामने आएगी।पेंसिल वाली, पेन वाली और मोहर वाली ऑडिट!मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ऑडिट की प्रक्रिया को लेकर सामने आई कथित बातचीत है।

















































