स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर तीखा प्रहार, मुख्यमंत्री के योगी नकली हिन्दू है

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी हैं, तो मुख्यमंत्री पद पर क्यों बने हुए हैं? उन्होंने पिछले माघ मेले का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश की तथाकथित हिंदू सरकार ने गेरुआधारी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनसे 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने का दुस्साहस किया था। स्वामी ने कहा कि उन्होंने समय सीमा में प्रमाण प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन इसके बदले उन्होंने सरकार को अपने असली हिंदू होने का प्रमाण देने के लिए 40 दिन का समय दिया था। योगी  आचरण से नकली हिंदू होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शंकराचार्य होने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की मान्यता का कोई महत्व नहीं है।

मांस उत्पादन और जीव-हिंसा पर सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पशुपालन मंत्री को एक लेख पढ़ने के लिए दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार गाय नहीं, बल्कि भैंस, बकरा और सुअर कटवाती है। यह स्वीकार्यता सुनकर हर असली हिंदू और संत लज्जित होंगे। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने से पहले राज्य का कुल मांस उत्पादन लगभग 7.5 लाख टन था, जो अब 13 लाख टन से अधिक हो गया है। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक निरपराध जीवों की हत्या हुई है, जो ‘वैध’ और ‘आधुनिक’ वधशालाओं के माध्यम से राजकीय संरक्षण प्राप्त है। स्वामी ने इसे ‘संहार’ करार दिया, न कि हिंदुत्व। उन्होंने कहा कि सरकार ‘हिंदूवादी’ मुखौटे के पीछे केवल वोटों के लिए गौ-भक्ति का प्रदर्शन करती है, जबकि राजस्व के लिए वधशालाओं को बढ़ावा दे रही है।

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केंद्रीय बजट पर आलोचना

स्वामी ने केंद्रीय बजट 2026 का जिक्र करते हुए कहा कि इसे ‘ऐतिहासिक’ बताया जा रहा है, जो मांस निर्यातकों को अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक असली हिंदू के लिए जीव-हिंसा को बढ़ावा देने वाला बजट ‘ऐतिहासिक विकास’ का पैमाना हो सकता है? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 10 दिनों के लेखा-जोखा में सुधार नहीं, बल्कि संहार ही दिख रहा है। उन्होंने आदि शंकराचार्य के मठाम्नाय महानुशासन का हवाला देते हुए कहा कि धर्म मनुष्यों का मूल है और वह आचार्य पर अवलंबित है। जो व्यक्ति स्वयं को हिंदू कहता है लेकिन शंकराचार्य को नहीं मानता, वह नकली हिंदू सिद्ध होता है।

धर्म और सत्ता पर चिंता

स्वामी ने कहा कि सच्चा धर्म शांति और संतोष का माध्यम है, लेकिन आज इसे सत्ता और संपत्ति का औजार बना लिया गया है। उन्होंने कुछ लोगों के दावे का जिक्र किया कि योगी ने नया कुछ नहीं किया, लेकिन सरकार के आंकड़े अलग कहानी बयां कर रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जोर देकर कहा कि यह शासन हिंदुत्व का नहीं, बल्कि संहार का प्रतीक है। क्या इसे संतत्व और महंतत्व कहा जा सकता है? उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसे आचरण पर विचार करें और सच्चे हिंदुत्व की रक्षा करें। यह हमला योगी सरकार की हिंदूवादी छवि पर बड़ा सवाल उठाता है, खासकर जब मांस उत्पादन और जीव-हिंसा जैसे मुद्दों पर विपक्ष भी सवाल उठा रहा है।\

INPUT-ANANYA MISHRA

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