किताबों का न करें इंतजार… CBSE ने कक्षा 6 में तीसरी भाषा (R3) को किया अनिवार्य, स्कूलों को 7 दिनों में लागू करने का निर्देश

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा 6 के छात्रों के लिए ‘तीसरी भाषा’ (R3) को अनिवार्य करने का बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को अगले 7 दिनों के भीतर इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है। यह पहल स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023 (NCF-SE 2023) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य छात्रों में भाषाई कौशल, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।

पाठ्यपुस्तक उपलब्ध न होने पर भी पढ़ाई शुरू करने का निर्देश

CBSE के सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि भले ही अभी आधिकारिक पाठ्यपुस्तकें जारी न हुई हों, स्कूलों को तीसरी भाषा का शिक्षण तुरंत शुरू करना अनिवार्य है। इस दौरान, स्थानीय रूप से उपलब्ध अध्ययन सामग्री का अस्थायी रूप से उपयोग करने की अनुमति दी गई है। स्कूलों को इस शुरुआत की जानकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को देनी होगी और OASIS पोर्टल पर भाषा चयन अपडेट करना होगा।

Also Read: CBSE के सिलेबस में बड़ा बदलाव: ‘इस्लाम का उदय’ और ‘मुगल साम्राज्य’ का चैप्टर किताब से हटाया, फैज अहमद फैज की शायरी भी हटाई

तीसरी भाषा (R3) मॉडल की विशेषताएँ

R3 मॉडल के तहत कक्षा 6 से 10 तक छात्रों को तीन भाषाएँ सीखनी होंगी। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएँ (जैसे हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि) होनी आवश्यक हैं। तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी या कोई अन्य विदेशी भाषा चुनी जा सकती है। यह मॉडल बहुभाषावाद, सांस्कृतिक समझ और भाषाई कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

निगरानी और दीर्घकालिक योजना

CBSE के क्षेत्रीय अधिकारी इस शुरुआत की निगरानी करेंगे और इससे जुड़ा डेटा इकट्ठा करेंगे। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 6 में शुरू की गई भाषाएँ ही आगे कक्षा 9 और 10 में विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगी। यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और 2031 तक पूरी तरह प्रभावी होने का लक्ष्य रखा गया है।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)