उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग (UPHED) ने नवाचारी शोध परियोजनाओं के लिए प्राणी विज्ञान विभाग को लगभग 12 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है। इस अनुदान से विभाग के पाँच शिक्षक विभिन्न महत्वपूर्ण शोध कार्य करेंगे, जिनमें फल मक्खी (ड्रोसोफिला) जैसे मॉडल जीवों से लेकर ट्रिपल नेगेटिव स्तन कैंसर जैसे गंभीर रोग तक के अध्ययन शामिल हैं। यह अनुदान विभाग की शोध क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
शोध परियोजनाएँ और अनुदान प्राप्तकर्ता
इस वर्ष अनुदान प्राप्त करने वाले शिक्षक और उनकी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:
डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह की परियोजना “पूर्वांचल क्षेत्र के वनस्पतियों का एथनोफार्माकोलॉजिकल मूल्यांकन ग्रीन-सिंथेसाइज्ड नैनोकणों का उपयोग करके वाइल्डटाइप ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर (ओरेगॉन R⁺) पर” है।
डॉ. सुशील कुमार की परियोजना “डायमंड बैक मॉथ (प्लूटेला जाइलोस्टेला) के नियंत्रण में पादप-आधारित जैव कीटनाशकों एवं सिंथेटिक कीटनाशकों का तुलनात्मक मूल्यांकन” है।
डॉ. सुनील कुमार सिंह की परियोजना “जलीय मछली चन्ना पंक्टेटस पर फाइटो कीटनाशकों का विषाक्त प्रभाव” है।
डॉ. सुनैना गौतम की परियोजना “टाइप 2 मधुमेह मेलिटस में न्यूरोप्रोटेक्शन हेतु सिग्नलिंग पाथवे को नियंत्रित करने में फिकस रिलीजियोसा की चिकित्सीय क्षमता की खोज: एक मॉडल जीव दृष्टिकोण” है।
डॉ. मनीष प्रताप सिंह की परियोजना “एनजीएस एवं ओमिक्स विश्लेषण के माध्यम से बीआरसीए-संबद्ध ट्रिपल नेगेटिव स्तन कैंसर में नए बायोमार्कर एवं चिकित्सीय लक्ष्यों की पहचान” है।
विभाग की निरंतर शोध उत्कृष्टता
पिछले वर्ष भी विभाग की डॉ. स्मिता सिंह और डॉ. अरुन्धति सिंह को UPHED से शोध अनुदान प्राप्त हुआ था। यह निरंतर सफलता विभाग की शोध संस्कृति और गुणवत्ता को दर्शाती है।
कुलपति का बयान
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्राणी विज्ञान विभाग के शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा, “ड्रोसोफिला जैसे मॉडल जीवों से लेकर ट्रिपल नेगेटिव स्तन कैंसर जैसे गंभीर रोग तक के शोध क्षेत्रों में हमारे प्राणी विज्ञान विभाग के शिक्षक अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं। लगभग 12 लाख रुपये का यह अनुदान उनकी मेहनत और शोध की गुणवत्ता का प्रमाण है। ये परियोजनाएँ न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा को संतुष्ट करेंगी बल्कि समाज के लिए ठोस समाधान भी प्रस्तुत करेंगी। मैं सभी अनुदान प्राप्तकर्ताओं को हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूँ।”
विज्ञान संकाय डीन का बयान
विज्ञान संकाय के डीन प्रो. अजय सिंह ने कहा, “प्राणी विज्ञान विभाग ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वह गुणवत्तापूर्ण एवं प्रासंगिक शोध के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले वर्ष दो शिक्षकों और इस वर्ष पाँच शिक्षकों को यूपीएचईडी से लगभग 12 लाख रुपये का अनुदान मिलना विभाग की शोध संस्कृति का प्रमाण है। मुझे पूरा विश्वास है कि ये परियोजनाएँ सतत कीट प्रबंधन, जलीय जीव संरक्षण, न्यूरोप्रोटेक्शन और कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।”
प्रशासन की प्रतिबद्धता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी शोधकर्ताओं को बधाई दी है और UPHED योजना के तहत अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
अनुदान प्राप्त शिक्षक
– डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह
– डॉ. सुशील कुमार
– डॉ. सुनील कुमार सिंह
– डॉ. सुनैना गौतम
– डॉ. मनीष प्रताप सिंह
यह जानकारी उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की नवाचारी शोध परियोजना योजना के तहत जारी की गई है। विभाग की आधिकारिक सूचना और विश्वविद्यालय के बयानों पर आधारित। यह अनुदान न केवल प्राणी विज्ञान विभाग के लिए गौरव की बात है, बल्कि कृषि, पर्यावरण संरक्षण, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों के बेहतर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। ऐसे शोध समाज के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करने में सहायक होंगे।














































