मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ

गोरखपुर/लखनऊ, 3 जूनः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष में खेती व किसानी के क्षेत्र में आए परिवर्तन के कारण अन्नदाता किसानों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। किसान भी अब समाज व राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं। देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि, सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी), रबी-खरीफ व जायद की फसलें यूपी में हो रही हैं। किसान जहां मेहनत कर रहा है, वहां उसे अच्छा दाम भी मिल रहा है। किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना। किसानों ने कृषि विकास दर को 8 फीसदी से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ किया।

2005-2014 के बीच देश के अलग-अलग स्थानों पर लाखों किसानों ने की आत्महत्या

सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पहले किसान सर्वाधिक आत्महत्या कर रहे थे। 2005 से 2014 के बीच देश के अलग-अलग स्थानों पर लाखों किसानों ने आत्महत्या की थी। इसके पीछे भी त्रासदी थी, उनके लिए अच्छी क्वालिटी का बीज, एमएसपी का उचित दाम, आपदा से बचाव का उपयुक्त प्रबंध नहीं था। लागत अधिक-उत्पादन कम था। यदि किसान ने मेहनत से अन्न उत्पादन भी किया तो उसके क्रय की उचित व्यवस्था नहीं थी।

धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण करा रही सरकार

सीएम ने कहा कि पहली बार कोई सरकार कह रही है कि जैसे हम अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप करवाते हैं, ऐसे ही धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण होना चाहिए। पीएम मोदी ने 2014 से अनिवार्य रूप से फ्री में स्वायल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू हुई। दलहन-तिलहन आयात में सरकार को लाखों-करोड़ रुपये खर्च कर अन्य देशों को देना पड़ता था, लेकिन किसानों को अच्छे बीज देकर दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष अभियान प्रारंभ किया।

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हमारी सरकार ने किसानों के लिए उठाए अभूतपूर्व कदम

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया, जिससे अन्नदाता साहूकार के सामने हाथ नहीं फैलाए और न ही कर्ज से दबे। मंडी में व्यापक रिफॉर्म किया गया। प्रदेश में जब डबल इंजन सरकार आई तो उसने भी इसे मजबूती से बढ़ाया। हमारी सरकार ने किसानों के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए। हमारी सरकार की 2017 में जो पहली कैबिनेट हुई, उसमें कर्ज से दबे किसानों को राहत दी गई। सरकार ने फसल ऋण की विशेष योजना प्रारंभ की। प्रयास रहा कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम प्राप्त हो। जगह-जगह सरकारी क्रय केंद्र खोलकर उसकी उपज को खरीदा गया।

दशकों से लंबित परियोजनाएं पूरी हुईं

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से सिंचाई की लंबित परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया। 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है।

यूपी ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को किया प्राप्त

सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद सर्वाधिक खाद्यान्न, चीनी मिल संचालन, चीनी उत्पादन, एथेनॉल, आलू, सब्जी, दुग्ध उत्पादन कर रहा है। सरकार के साथ किसानों ने भी मेहनत प्रारंभ किया तो परिणाम सामने है। सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझाव/परेशानी को जानती है।

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आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा। सरकार का काम है कि किसान शोषण-अभाव से मुक्त हो, उसके सामने चुनौती न हो, उनके कार्यों में पड़े बैरियर को हटाया जाए। उन्हें अच्छा बीज मिल सके, सुविधा संपन्न करने के साथ उन्हें मंडी से जोड़ा जाए और समय पर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। उत्तर प्रदेश में यह सब संभव हो पा रहा है। यूपी के पास केवल 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि है, जिसमें किसान 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन कर रहे हैं। यहां की आबादी 16-17 फीसदी है। खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसलों में यूपी देश को लीड कर रहा है, इसके बावजूद भी कई चुनौतियां हैं।

आपदा के शिकार किसानों के परिजनों को 24 घंटे के भीतर मिल रही पांच लाख की सहायता

सीएम ने कहा कि यूपी में किसानों, सह किसानों (बटाईदारों) व उनके पारिवारिक सदस्यों को भी आपदा में हादसे का शिकार होने पर मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना से कवर किया गया है। इस पर सरकार हर वर्ष एक हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली, वन्यजीव संघर्ष का शिकार हुआ तो सरकार 24 घंटे के अंदर उसे पांच लाख रुपये की सहायता परिवार को उपलब्ध कराती है।

लखनऊ में सीड पार्क, कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का हो रहा निर्माण

सीएम योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क, कुशीनगर में कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र उत्तम तकनीक देने व बीज की क्वालिटी के बारे में जानकारी के माध्यम बने हैं इसके बाद भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। जितना किसानों ने उत्पादन बढ़ाया है, इसमें अभी लगभग तीन गुना और वृद्धि कर सकते हैं। हमें बीज की क्वालिटी, तकनीक और समय पर खेतीबाड़ी-फसल चक्र को अपनाना पड़ेगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा। किसान इस दिशा में कार्य प्रारंभ करें।

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सीएम ने चुनौतियों पर भी चर्चा की

सीएम ने चुनौतियों की चर्चा की, कहा कि उत्पादन का पहला कार्य प्रारंभ होता है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हो। सीएम ने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा। आम का यहां 40-50 रुपये दाम मिलेगा, जबकि यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशों में 800 से 1000 रुपये मिलता है। कार्गो का दाम डेढ़ सौ-200 रुपये होगा, फिर भी 600 रुपये प्रति किलो की बचत होगी। इसके लिए क्वालिटी जरूरी है। सरकार ने कार्गो के सेंटर विकसित किए हैं। सीएम ने अपील की कि खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसल आदि में न्यूनतम केमिकल-पेस्टिसाइड का प्रयोग करें।

किसान को पता है कि कब क्या करना है

सीएम ने निर्यात के मानकों पर खरा उतरने पर जोर देते हुए प्राकृतिक खेती (गो आधारित खेती) पर बल दिया, कहा कि इससे गोमाता की रक्षा भी होगी और केमिकल-पेस्टिसाइट से भी खेती का बचाव होगा। यह लागत को कम करने का भी माध्यम हो सकता है। किसान स्वयं वैज्ञानिक है। उसे पता है कि कब क्या करना है, बस तारतम्यता से जोड़ने की तैयारी करें। अतिवृष्टि व अनावृष्टि से बचने के लिए अभी से मौसम विभाग द्वारा दिए जाने वाले बुलेटिन के अनुरूप फसल चक्र को तैयार करें। यह कार्य बढ़ेंगे तो किसान की आमदनी भी बढ़ेगी।

सीएम ने सहफसली खेती पर भी दिया जोर

सीएम ने फसल के विविधीकरण की चर्चा करते हुए गन्ना, सब्जियों के साथ ही सहफसली खेती पर भी जोर दिया। बोले-ऐसा करने वाले किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। पिछले वर्ष मैंने व कृषि मंत्री ने मध्य यूपी के कई जनपदों में जाकर देखा कि किसान ने जैसे ही गेहूं का फसल काटा, तत्काल मक्का की खेती प्रारंभ की। इससे उन्हें एक लाख रुपये प्रति एकड़ की बचत भी हो रही है।

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पहले किसानों को नहीं मिलती थी सिंचाई, सुविधा और सुरक्षा

सीएम ने कहा कि पहले यूपी में सुरक्षा, सिंचाई, क्रय केंद्र, सरकार की सुविधा नहीं थी तो किसान बमुश्किल एक से दो फसल बोता था। अच्छे बीज नहीं मिल पाते थे। आज किसान खेत में तीन-तीन फसल करके अच्छा मुनाफा कमा रहा है। बिना टैक्स बढ़ाए सरकार ने एमएसपी के माध्यम से अच्छा पैसा दिया। 2016-17 में 300 रुपये गन्ना भुगतान था, आज 400 रुपये प्रति कुंतल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक, अच्छी क्वालिटी के बीज अपनाएं, केमिकल-पेस्टिसाइड को न्यूनतम कर प्राकृतिक खेती पर जोर दें तो बेहतर लाभ मिलेगा।

किसानों को सही दिशा देगी खरीफ गोष्ठी

सीएम ने गोष्ठी की उपयोगिता पर बल दिया, कहा कि आत्मनिर्भर व विकसित भारत के लिए विकसित खेती आज की आवश्यकता है। किसान तीन फसलों का व्यापक पैमाने पर उत्पादन करता है। फसल चक्र और उसकी चुनौतियों को ध्यान मे रखते हुए जो भी परिस्थिति आती है, उसका कैसे मुकाबला कर सकते हैं। इस पर ध्यान देना होगा। इस बार मानसून औसत से कम बताया जा रहा है। इसके लिए रणनीति तय होनी चाहिए। यह गोष्ठी किसानों को सही दिशा देगी। सीएम ने कोरोना के दौरान भी किसानों की ताकत का जिक्र किया।

इस दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।

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