महिला बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग कार्यक्रम का आयोजन

गोरखपुर, 4 जून 2026। महामहिम कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के सफल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में महिला अध्ययन केंद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में “महिला बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग” विषय पर विशेष योग प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन महिला बैरक, जिला कारागार, गोरखपुर में प्रातः 6:30 बजे किया गया।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की गतिविधियों को “Yoga for Healthy Ageing” विषय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक आयु वर्ग में योग के माध्यम से स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित जीवन शैली को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में महिला बंदियों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम योग को समाज के उन वर्गों तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा, जिन्हें मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग की विशेष आवश्यकता होती है।

कार्यक्रम का शुभारंभ योग एवं ध्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया गया। उपस्थित महिला बंदियों को बताया गया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र जीवन पद्धति है। कारागार जैसे वातावरण में, जहाँ व्यक्ति अनेक मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करता है, वहाँ योग तनाव प्रबंधन, आत्मनियंत्रण तथा सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन का संदेश भी साझा किया गया। उन्होंने कहा कि—

“हमारा लक्ष्य है कि महिला कैदियों को योग के माध्यम से आत्म-निरीक्षण, आत्म-नियंत्रण और आत्म-विश्वास की भावना विकसित करने में मदद मिले। इस पहल से कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनके पुनर्वास की प्रक्रिया भी सशक्त होगी। योग व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।”

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कार्यक्रम में प्रशिक्षित योगाचार्यों द्वारा महिला बंदियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया गया। योग सत्र की शुरुआत शरीर को सक्रिय एवं ऊर्जावान बनाने वाले अभ्यासों से हुई, जिसके अंतर्गत ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन एवं वज्रासन का अभ्यास कराया गया। इन आसनों के माध्यम से शरीर की लचीलापन, संतुलन क्षमता तथा मांसपेशियों की शक्ति बढ़ाने के महत्व को समझाया गया।

मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से ऐसे योगाभ्यासों का चयन किया गया जो तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक हों। इसमें सुखासन, बालासन, शवासन, पश्चिमोत्तानासन, पवनमुक्तासन, अधोमुख श्वानासन, उष्ट्रासन तथा सेतु बंधासन का अभ्यास कराया गया। योग प्रशिक्षकों ने प्रत्येक आसन के शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि नियमित अभ्यास से मन में शांति, भावनात्मक संतुलन तथा आत्मविश्वास का विकास होता है।

कार्यक्रम के दौरान नाड़ी शोधन प्राणायाम, अनुलोम-विलोम तथा ध्यान साधना का भी अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि नाड़ी शोधन प्राणायाम मस्तिष्क की दोनों गोलार्द्धों के बीच संतुलन स्थापित करता है तथा मानसिक तनाव, क्रोध और चिंता को कम करने में अत्यंत प्रभावी है। ध्यान सत्र के माध्यम से महिला बंदियों को वर्तमान क्षण में रहने, नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेष आकर्षण के रूप में योग प्रशिक्षिका द्वारा हास्य योग (Laughter Yoga) का अभ्यास भी कराया गया, जिसमें महिला बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस गतिविधि ने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया तथा प्रतिभागियों के चेहरे पर मुस्कान और आत्मीयता का भाव दिखाई दिया। साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बटरफ्लाई आसन, अर्ध कटि चक्रासन तथा मरीचि आसन का भी अभ्यास कराया गया।

महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है। महिला बंदियाँ भी समाज का अभिन्न अंग हैं और उन्हें आत्म-विकास तथा पुनर्वास के समान अवसर प्राप्त होने चाहिए। उन्होंने कहा कि योग एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति के भीतर आशा, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का संचार करता है तथा जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।

उन्होंने आगे बताया कि महिला अध्ययन केंद्र भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की योजना बना रहा है। साथ ही यह भी विचार किया जा रहा है कि इच्छुक एवं शिक्षित महिला बंदियों को प्रशिक्षित कर “योग साथी” के रूप में विकसित किया जाए, जिससे वे अन्य बंदियों को भी योगाभ्यास के लिए प्रेरित कर सकें। इससे कारागार के भीतर सकारात्मक वातावरण के निर्माण में सहायता मिलेगी।

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कार्यक्रम में जिला कारागार प्रशासन का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में जेल के अधीक्षक डी.के पांडे जी, जेलर अरुण कुमार और महिला जेल की उप-जेलर अनीता श्रीवास्तव भी उपस्थिति रही इनके सयुक्त प्रयासो से कारागार प्रशासन द्वारा महिला बंदियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई तथा योगाभ्यास हेतु आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई गईं। कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों ने योगाभ्यास के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट योग एवं ध्यान करने, पाँच मिनट तक ओम् उच्चारण करने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित महिला बंदियों ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योगाभ्यास से उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन तथा नई ऊर्जा का अनुभव हुआ।

यह कार्यक्रम केवल एक योग प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि कारागार सुधार, मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक पुनर्वास की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किया गया एक संवेदनशील एवं सराहनीय प्रयास है। महिला अध्ययन केंद्र की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि योग के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है तथा स्वस्थ, सम्मानजनक एवं आशावादी जीवन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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