गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर ने एक महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के डॉ. यू. वेंकटेश के नेतृत्व में किए गए बहुकेंद्रित अध्ययन को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित किया गया है।
डॉ. वेंकटेश का तीसरा Lancet प्रकाशन
यह डॉ. यू. वेंकटेश का Lancet-family जर्नल में प्रथम लेखक के रूप में तीसरा मूल शोध (Original Research) प्रकाशन है। उल्लेखनीय है कि ये सभी शोध एम्स गोरखपुर में उनके कार्यकाल के दौरान पूरे किए गए हैं।
अध्ययन का शीर्षक और दायरा
अध्ययन का शीर्षक है — “Association of bidi smoking and tobacco-use patterns with cancer risk in India: a multicentre unmatched case-control study (2024–2025)”।
इस शोध में भारत के सात राज्यों के आठ प्रमुख चिकित्सा संस्थानों — AIIMS Gorakhpur, AIIMS Rajkot, AIIMS Rishikesh, AIIMS Guwahati, AIIMS Kalyani, AIIMS Patna, Gauhati Medical College and Hospital तथा Mahatma Gandhi Institute of Medical Sciences, Sevagram — को शामिल किया गया। अध्ययन में 2037 कैंसर मरीजों और 2066 नियंत्रण समूह के व्यक्तियों को शामिल किया गया।
शोध की मुख्य खोजें
अध्ययन में पाया गया कि:
– केवल बीड़ी पीने वालों में कैंसर का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक था।
– बीड़ी और smokeless tobacco दोनों का उपयोग करने वालों में जोखिम लगभग चार गुना अधिक।
– Poly-tobacco users (एक से अधिक प्रकार का तंबाकू सेवन) में जोखिम चार गुना से भी अधिक पाया गया।
– बीड़ी सेवन की अवधि और प्रतिदिन पी जाने वाली बीड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ कैंसर का जोखिम भी बढ़ता गया (Dose-Response Relationship)।
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महत्वपूर्ण निष्कर्ष
यह अध्ययन भारत में बीड़ी सेवन को विभिन्न प्रकार के कैंसर से जोड़कर देखने वाले प्रमुख बहुकेंद्रित शोधों में से एक है। इससे पहले अधिकांश अध्ययन केवल फेफड़े के कैंसर तक सीमित थे।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह निष्कर्ष भारत में तंबाकू नियंत्रण नीतियों, बीड़ी पर विशेष चेतावनी, कराधान और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करेगा।
एम्स गोरखपुर की भूमिका
एम्स गोरखपुर से डॉ. शशांक शेखर (रेडियोथेरेपी) ने अध्ययन के क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी हिस्से में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, SM (Retd.) भी सह-लेखक हैं।
कार्यकारी निदेशक का बयान
मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने कहा, “यह प्रकाशन एम्स गोरखपुर की बढ़ती शोध क्षमता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अध्ययन कैंसर रोकथाम और तंबाकू नियंत्रण नीतियों को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।”
डॉ. यू. वेंकटेश ने सभी सहयोगी संस्थानों और टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। यह शोध Bloomberg Philanthropies के सहयोग से पूरा किया गया।
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