वाराणसी: अपने दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार की शाम काशी पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दौरे के दूसरे दिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन में आयोजित विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। इस दौरान उनके साथ मंच पर कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी भी मौजूद रहे और उन्होंने उन्हें अंग वस्त्र भेंट कर उनका अभिवादन किया।
इस दौरान सीएम ने एक कहानी के जरिए छात्रों को समझाया कि किस प्रकार उन्होंने बचपन में गंगा नदी के महत्व को और पवित्रता को जाना था। उन्होंने बताया कि बचपन में वह अपनी मां के साथ मिलकर छोटी-छोटी क्यारियों में फूलों और फलों की खेती किया करते थे। उन्होंने बताया कि हम सभी लोग बड़े उत्साह पूर्वक पेड़ पौधों में पानी डालकर और उनकी रखवाली करते थे। इसी बीच उन्होंने देखा कि एक पौधा खराब हो गया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी मां को यह बात बताई।
सीएम योगी ने कहा कि उनकी मां ने सौम्यता पूर्वक उनकी बात सुनी और कुछ देर बाद गंगाजल लेकर पौधे पर छिड़क दिया। सीएम योगी ने बताया कि दो-तीन दिन के बाद ही पौधा ठीक होने लगा और उसमें फूल खिलने लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दुर्भाग्य है की गंगा की पवित्रता काम होते जा रही है और लोग उसे अशुद्ध और प्रदूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
दरअसल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन हो रहा है, जिसका उद्घाटन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है और 14 जून तक चलने वाले इस अधिवेशन में देश और विदेश से आने वाले करीब 1200 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इनमें शिक्षाविद, शोधकर्ता, विज्ञान भारती के सदस्य और उद्योग जगत के प्रतिनिधि समेत कई विशेषज्ञ शामिल होने वाले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करने से खेत की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है और ऐसे में फसल का नुकसान हो जाता है इस पर अगर ध्यान ना दिया जाए तो धीरे-धीरे भूमि बंजर भूमि में तब्दील हो जाती है। उन्होंने बताया कि यही कारण है कि पुराने समय के किसान अपने खेतों में प्राकृतिक रूप से खेती किया करते थे और इस कारण जमीन उपजाऊ बनी रहती थी और खेत फसलों से लहलहा उठाते थे।
















































